अमन व शांति के पर्याय थे भगवान बुद्ध : भंते विनयाचार्य

अमन व शांति के पर्याय थे भगवान बुद्ध : भंते विनयाचार्य
खीरी मठ मठवाटांड़ स्थित प्राचीन बौद्ध मठ में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित गोला. गोला प्रखंड के खीरी मठ मठवाटांड़ स्थित प्राचीन बौद्ध मठ में शुक्रवार को भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गयी. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बौद्ध भिक्षु भंते विनयाचार्य ने किया. मुख्य अतिथि भंते विनयाचार्य ने कहा कि भगवान बुद्ध अमन और शांति के प्रतीक थे. जो भी व्यक्ति बुद्ध की शरण में आता है, उसे जीवन में शांति और सुकून प्राप्त होता है. उन्होंने लोगों को पंचशील के सिद्धांतों की जानकारी देते हुए उसका पालन करने का संकल्प भी दिलाया. भगवान बुद्ध के जन्म, उनके उपदेशों एवं मानव जीवन में उनकी शिक्षाओं के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने अधिकारों और हक के प्रति पर्याप्त जागरूक नहीं हैं. इसके कारण उन्हें समाज में उचित स्थान नहीं मिल पाता है. इस दौरान श्रद्धालुओं के बीच खीर भोग का वितरण भी किया गया. इस अवसर पर बड़कागांव विधायक रोशनलाल चौधरी, भारती कुशवाहा, संतोष चौधरी, बौद्ध भिक्षु कमलेश कुमार, विजय कुमार, रामदयाल, अनीता, बालेश्वर दांगी, श्याम किशोर कश्यप, मगन महतो, कमलेश कुमार पिंगले, चतुर्भुज कश्यप, लखींद्र कुशवाहा, उत्तम कुमार कुशवाहा, साधु महतो, करमू नायक, राजकुमार, अजीत कुमार, महेंद्र प्रसाद, जगरनाथ चौधरी, अशोक कुमार, श्रीकांत महतो, जगमोहन मुंडा, महेंद्र महतो, सुबोध महतो, जयंत कुशवाहा, कुंदन कुशवाहा, हरि कुमार, संतोष साव, ममता सिंह, अंजू कुमारी, मीणा रंजन एवं वर्षा रंजन मौजूद थे. कलिंग युद्ध के समय बनाये गये थे 84 हजार मठ : भंते विनयाचार्य ने बताया कि यह बौद्ध मठ लगभग 2200 वर्ष पुराना माना जाता है. इसका संबंध सम्राट अशोक काल से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है. उन्होंने कहा कि कलिंग युद्ध के दौरान सम्राट अशोक अपनी सेना के ठहराव के लिए विभिन्न स्थानों पर 84 हजार मठों का निर्माण कराते थे. यह मठ भी उन्हीं में से एक हो सकता है. उन्होंने बताया कि मठ के समीप तालाब भी मौजूद था, जिससे ठहरने वाले लोगों को पानी उपलब्ध हो सके. आसपास धम्म चक्र दबा होने तथा मठ की दीवारों और संरचना को देख कर इसके प्राचीन बौद्ध स्थल होने के कई प्रमाण मिलते हैं. यदि यहां पुरातात्विक खुदाई करायी जाये, तो बुद्ध प्रतिमा समेत कई ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हो सकते हैं. भंते विनयाचार्य ने कहा कि रामगढ़ जिला प्रशासन ने इस मठ को प्राचीन स्थल के रूप में चिह्नित किया है. इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पुरातत्व विभाग से भी अनुरोध किया जायेगा. पहले लोग कहते थे भूतिया मठ : स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले कुछ लोग इस स्थान को भूतिया मठ कह कर लोगों में डर फैलाते थे. इस कारण लोग यहां आने से कतराते थे. जब मठ की साफ-सफाई करायी गयी और निरीक्षण हुआ, तब इसे प्राचीन बौद्ध मठ के रूप में पहचान मिली.
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