रामगढ़ के गोला में हाथियों का आतंक: रौंद दिया मकई की फसल, किसानों को भारी नुकसान

जंगली हाथियों द्वारा मकई की रौंदी गई फसल को दिखाता किसान. फोटो: प्रभात खबर
Ramgarh News: रामगढ़ के गोला वन क्षेत्र के सुतरी गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने किसानों की मकई फसल को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया. करीब 40 क्विंटल फसल बर्बाद होने से किसान परेशान हैं. ग्रामीणों ने वन विभाग से मुआवजा और हाथियों के स्थायी समाधान की मांग की है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
गोला से राजकुमार की रिपोर्ट
Ramgarh News: गोला वन क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है. गुरुवार रात सुतरी गांव में हाथियों के झुंड ने खेतों में घुसकर जमकर तबाही मचायी. इस दौरान जगेश्वर महतो के स्वीट कॉर्न (मकई) के खेत को भारी नुकसान पहुंचा. हाथियों ने खेत में लगी मकई की फसल को खाकर और रौंदकर बर्बाद कर दिया. शुक्रवार सुबह जब किसान खेत पहुंचे तो फसल की स्थिति देखकर परेशान हो गये. खेतों में लगी फसल पूरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आई.
40 क्विंटल मकई की फसल हुई नष्ट
जगेश्वर महतो ने बताया कि करीब 40 क्विंटल मकई की फसल हाथियों के कारण नष्ट हो गयी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई है. इसके अलावा अलका महतो, राजू महतो, सुलेखा देवी और गुलाबी देवी के खेतों में लगी फसलों को भी हाथियों ने नुकसान पहुंचाया.
तीन सप्ताह से बना हुआ है हाथियों का आतंक
ग्रामीणों के अनुसार पिछले तीन सप्ताह से सुतरी और आसपास के इलाकों में हाथियों का लगातार आतंक बना हुआ है. रात होते ही ग्रामीण भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं.
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वन विभाग से की गई कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के स्थायी समाधान की मांग करते हुए प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की अपील की है. लोगों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाये गये तो किसानों को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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