झारखंडी जायके में छिपा है सेहत का राज: पलामू के सेमिनार में स्थानीय मोटे अनाजों को कुपोषण का बताया गया समाधान

Edited by Sameer Oraon
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दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत करते अतिथि

NPU Palamu Seminar: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के अंतर्गत वाईएसएनएम महिला महाविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में झारखंड के स्थानीय भोजन और संस्कृति के महत्व पर चर्चा हुई. मुख्य अतिथि ट्री-मैन कौशल किशोर जायसवाल और कुलपति डॉ. दिनेश सिंह सहित कई वैज्ञानिकों ने सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक खान-पान को बढ़ावा देने का आह्वान किया.

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NPU Palamu Seminar, पलामू (चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट): पलामू के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय अंतर्गत आने वाला योध सिंह नामधारी (YSNM) महिला महाविद्यालय द्वारा झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के सहयोग से शनिवार को एक गरिमामय शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. पंडित दीनदयाल स्मृति नगर भवन में आयोजित इस दो दिवसीय बहुविषयक संगोष्ठी का विषय ‘व्हेयर कल्चर मीट्स न्यूट्रिशन: झारखंड लोकल फूड फॉर अ सस्टेनेबल टुमारो’ रहा. इस सेमिनार का उद्देश्य राज्य की पारंपरिक खाद्य प्रणालियों को आधुनिक पोषण विज्ञान के साथ जोड़कर भविष्य के लिए एक स्थायी मार्ग तैयार करना था.

पर्यावरण धर्म और प्रकृति के संरक्षण की अपील

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और प्रसिद्ध पर्यावरणविद ‘ट्री मैन’ कौशल किशोर जायसवाल ने पलामू सहित पूरे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यहां का भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय अनाजों की उस शक्ति का प्रतीक है जो हमें कुपोषण से लड़ने में सक्षम बनाती है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदूषण और जल संकट जैसी वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए अब ‘पर्यावरण धर्म’ को अपनाना अनिवार्य है. जायसवाल ने जोर दिया कि जब तक मनुष्य पेड़ों के साथ भावनात्मक संबंध स्थापित नहीं करेगा, तब तक प्रकृति का पूर्ण संरक्षण संभव नहीं है.

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खेती में सुधार और जल-प्रबंधन पर मंथन

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने पलामू की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि झारखंड में चावल की खेती के साथ-साथ फलदार वृक्षों के विकास की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि हमें ऐसी फसलों और वर्षा आधारित खाद्यान्नों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है. वहीं, कुलसचिव डॉ. नफीस अहमद ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में आंवले के सफल नवाचार का उदाहरण देते हुए झारखंड में भी इसी प्रकार की आर्थिक और सामाजिक पहल की आवश्यकता बताई.

तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुति

इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण अकादमिक उपलब्धि के रूप में तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया. इसमें डॉ. अंबालिका प्रसाद की दो पुस्तकें- ‘प्रिंसिपल ऑफ इकोटॉक्सिकोलॉजी’ व ‘हैंडबुक ऑफ मॉडर्न टॉक्सिकोलॉजी’ और डॉ. ललिता भगत की पुस्तक ‘दार्शनिक विवेचना’ का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया. इससे पूर्व, कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुआ और छात्राओं ने ‘हाय रे हमर सोनार झारखंड’ गीत पर मनमोहक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति की झलक पेश की.

प्रमुख दिग्गजों की रही गरिमामय उपस्थिति

सेमिनार की संयोजिका डॉ. मिनी टुडू ने विषय प्रवेश कराया और प्राचार्या डॉ. मोहिनी गुप्ता ने अतिथियों का अभिनंदन झारखंडी सिल्क शॉल और छात्राओं द्वारा बनाई गई सोहराई पेंटिंग भेंट कर किया. इस अवसर पर जेपी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. फारुक अली, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बी दिनेश कुमार, पलामू के पूर्व आयुक्त डॉ. जटा शंकर चौधरी, आईसीएआर के डॉ. रणबीर सिंह, उद्यमी अरुणा तिर्की और डॉ. अंजुला मुर्मू सहित कई शिक्षाविद मौजूद रहे. मंच का संचालन डॉ. जेनिफर गुड़िया ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संगीता कुजूर द्वारा दिया गया.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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