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Champai Soren: चंपाई सोरेन मांझी परगना वैसी महासम्मेलन में बोले, घुसपैठियों को दूध से मक्खी की तरह निकाल फेंकेंगे

Updated at : 16 Sep 2024 10:48 PM (IST)
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पूर्व सीएम चंपाई सोरेन

पूर्व सीएम चंपाई सोरेन

Champai Soren: पाकुड़ जिले के हिरणपुर स्थित डांगापाड़ा में मांझी परगना वैसी महासम्मेलन का आयोजन किया गया. पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा कि आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करनेवाले बांग्लादेशियों को दूध से मक्खी की तरह निकालकर फेंक देंगे. जल, जंगल, जमीन एवं परंपरा को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा.

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Champai Soren: हिरणपुर (पाकुड़)-हिरणपुर प्रखंड के डांगापाड़ा फुटबॉल मैदान में सोमवार को मांझी परगना वैसी महासम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य रूप से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, बोरियो के पूर्व विधायक लोबिन हेंब्रम, जामा की पूर्व विधायक सीता सोरन, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष बाबुधन मुर्मू, समाजसेवी निर्मल मुर्मू सहित अन्य मौजूद थे. कार्यक्रम में कई गांवों से मांझी, पारानिक, जोगमांझी, जोगपरानिक शामिल हुए. महासम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा कि पाकुड़ में ऐसे-ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनके पास बांग्लादेश एवं झारखंड दोनों जगहों के वोटर-आईडी कार्ड हैं. ऐसे लोगों को दूध से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देंगे.

आदिवासियों को वापस दिलाएंगे जमीन

चंपाई सोरेन ने कहा कि घुसपैठियों द्वारा हमारे गांव-जमीन पर कब्ज़ा कर लिया गया है. आनेवाले दिनों में आदिवासियों के जिन गांवों एवं जमीनों को छीना गया है, उसे वापस आदिवासियों को दिलाएंगे. चंपाई ने कहा कि जब देश अंग्रेजों के अधीन था, उस वक़्त पाकुड़ के मार्टिलो टावर से अंग्रेजों द्वारा छिपकर गोलियां बरसायी जा रही थीं. उस वक़्त हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों की गोलियां झेलीं. सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो द्वारा जल, जंगल, जमीन, महिलाओं की इज्जत एवं परंपरा को बचाने के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया था. आज के समय जल, जंगल, जमीन एवं परंपरा को बचाने के लिए हम सब को सामने आना होगा.

भारी बारिश में भी जुटे रहे आदिवासी-मूलवासी

भारी बारिश के बावजूद हज़ारों आदिवासी-मूलवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा. कार्यक्रम स्थल में लोग छाता लेकर पूर्व मुख्यमंत्री को सुनने पहुंचे. अतिथियों का पारंपरिक पगड़ी व गमछा पहनाकर उनका स्वागत किया गया. महासम्मेलन विलुप्त हो रही आदिवासी संस्कृति, संथाल परगना की पारंपरिक व्यवस्था पर संवाद किया गया. साथ ही जल, जंगल, जमीन, जाहेर थान एवं मांझी थान को बचाने पर चर्चा की गयी.

बांग्लादेशी लूट रहे आदवासियों की जमीन

लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि संथाल परगना में बंगलादेशी घुसपैठ जारी है. बांग्लादेशियों द्वारा आदिवासियों के जमीन को लूटा जा रहा. उन्होंने कहा कि क्या इन सब चीजों की जानकारी मुख्यमंत्री को नहीं है? मुख्यमंत्री को आदिवासियों की कोई चिंता नहीं है. सबकुछ जानकर भी वे केवल अपने वोट बैंक के कारण मौन है. आदिवासियों की संख्या हर जगह घट रही है, इसका जिम्मेदार कौन है?

खनिज संपदा से भरे झारखंड का नहीं हुआ विकास : सीता

सीता सोरेन का कहा कि झारखंड में खनिज संपदा का भंडार है. इसके बावजूद यहां विकास नहीं हुआ है. लोग बेरोजगारी के कारण अपने राज्य छोड़कर दूसरे राज्य पलायन करने को मजबूर हैं. यहां के भोलेभाले आदिवासियों को शोषण किया जा रहा है. झामुमो पार्टी में मान-सम्मान नहीं है. माइंस क्षेत्र होने के बाद भी यहां के लोगों को पीने के लिए पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य के लिए परेशानी है. क्या यही है विकास? बांग्लादेशी घुसपैठियों लगातार बढ़ रही है. इसको रोकना बहुत जरूरी है. मौके पर मांझी वैसी परगना के जिला अध्यक्ष निर्मल टुडू, संथाल परगना प्रभारी राजीव हेम्ब्रम, सुनिराम सोरेन, महेंद्र किस्कू, सत्येंद्र किस्कू आदि मौजूद रहे.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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