सड़क दुर्घटना में पीड़ित परिवार को जल्द कैसे मिलेगा मुआवजा? लोहरदगा में वर्कशॉप का आयोजन

Updated at : 11 Mar 2026 8:26 AM (IST)
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Lohadagga News

लोहरदगा के सिविल कोर्ट में कार्यशाला का उद्घाटन करते प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकमल मिश्रा (बीच में).

Lohardaga News: लोहरदगा सिविल कोर्ट कैंप में मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों को लेकर कार्यशाला आयोजित की गयी. इसमें सड़क दुर्घटना पीड़ितों को जल्द मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया, एफएआर की भूमिका और हिट एंड रन मामलों में मिलने वाली सहायता राशि की जानकारी दी गयी. पुलिस, अधिवक्ता और बीमा अधिकारियों ने भाग लिया. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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लोहरदगा से गोपी कृष्ण की रिपोर्ट

Lohardaga News: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) रांची के मार्गदर्शन में मंगलवार 10 मार्च 2026 को लोहरदगा के सिविल कोर्ट कैंपस के सभाकक्ष में मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला का उद्देश्य सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना था. इस कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) राजकमल मिश्रा, डालसा सचिव राजेश कुमार, डीएसपी मुख्यालय समीर तिर्की, ओरियंटल इंश्योरेंस के प्रबंधक शिव प्रकाश, रिसोर्स पर्सन जेपीएन सिन्हा तथा मध्यस्थ सह पैनल अधिवक्ता लाल धर्मेंद्र देव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए मुआवजे का प्रावधान

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकमल मिश्रा ने कहा कि सड़क दुर्घटना में पीड़ितों के लिए कानून में सुनिश्चित मुआवजे का स्पष्ट प्रावधान किया गया है. यदि दुर्घटना के बाद समय पर एफएआर (प्रथम दुर्घटना रिपोर्ट) दाखिल कर दी जाए तो पीड़ित परिवार को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया काफी तेज हो सकती है. उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे दुर्घटना से संबंधित सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन करें और पीड़ित परिवार को भी मुआवजा मिलने की व्यवस्था के बारे में जानकारी दें.

पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण

कार्यशाला में डीएसपी मुख्यालय समीर तिर्की ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि पुलिस यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि दुर्घटना के मामलों में एफएआर समय पर तैयार कर एमएसीटी कोर्ट में जमा किया जाए. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ दुर्घटना होती है तो सरकार और न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए.

वाहन बीमा की अनिवार्यता पर जोर

ओरियंटल इंश्योरेंस के प्रबंधक शिव प्रकाश ने वाहन बीमा के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि हर वाहन का बीमा होना बेहद जरूरी है. कम से कम थर्ड पार्टी बीमा होना अनिवार्य है. उन्होंने बताया कि लगभग 3000 रुपये में चार पहिया वाहन और करीब 1300 रुपये में दो पहिया वाहन का बीमा कराया जा सकता है. यदि वाहन बीमित होता है तो दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित पक्ष के प्रति जवाबदेही बीमा कंपनी उठाती है, जिससे पीड़ित को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया आसान हो जाती है.

मुआवजे की राशि तय करने का आधार

कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन जेपीएन सिन्हा ने बताया कि दुर्घटना में पीड़ित को मिलने वाले मुआवजे की राशि कई कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती है. इसमें पीड़ित की आयु, आय, आश्रितों की संख्या, वैवाहिक स्थिति और अन्य परिस्थितियों को आधार बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि इन सभी तथ्यों का सही तरीके से दस्तावेजीकरण होने से पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में मदद मिलती है.

हिट एंड रन मामलों में भी सहायता

डालसा सचिव राजेश कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना के मामलों में एफएआर 48 घंटे के अंदर एमएसीटी कोर्ट में जमा किया जाना चाहिए. इससे मुआवजे की प्रक्रिया तेज हो जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि यदि दुर्घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो जाता है तो ऐसे मामलों को हिट एंड रन केस माना जाता है. ऐसे मामलों में मृतक के आश्रितों को 2 लाख रुपये और घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. इसके लिए आवेदन एसडीओ कार्यालय में जमा करना होता है और ऐसे मामलों में अन्वेषण अधिकारी एसडीओ होते हैं.

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2025 में आए 17 हिट एंड रन मामले

अनुमंडल कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक लोहरदगा में हिट एंड रन के कुल 17 मामले दर्ज किए गए. इनमें से आठ मामलों में मृतकों के आश्रितों के बीच 16 लाख रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है, जबकि नौ मामले अभी जीआईसी के स्तर पर लंबित हैं. कार्यशाला में एलएडीसीएस के अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता, विभिन्न थानों के पुलिस अधिकारी, पीएलवी सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे. कार्यक्रम में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को शीघ्र न्याय और मुआवजा दिलाने के लिए समन्वय और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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