हजारीबाग में अधिकारी बेपरवाह, शहर की सड़कों पर पड़ा है मलबों का ढेर

हजारीबाग के अन्नदा चौक, कचहरी रोड, तकिया मजार और विमेंस कॉलेज जोड़ने वाली मुख्य सड़क (चौराहे) पर मलवे का लगा ढेर. फोटो: प्रभात खबर
Hazaribagh News: हजारीबाग में कचहरी से आनंद चौक और जिला स्कूल से विमेंस कॉलेज जाने वाली लाइफ लाइन सड़क बदइंतजामी का शिकार है. नाली निर्माण के बाद सड़क पर मलबा नहीं हटाने से दुर्घटनाओं और जाम की समस्या बढ़ गई है. शहरवासी प्रशासन और नए मेयर से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh News: झारखंड के हजारीबाग में सरकारी बाबुओं की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. शहर की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक कचहरी से आनंद चौक जाने वाली सड़क और जिला स्कूल से होते हुए विमेंस कॉलेज की ओर जाने वाली सड़क इन दिनों बदइंतजामी का शिकार है. यह सड़क शहरी क्षेत्र के लिए लाइफ लाइन मानी जाती है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यहां की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है. एक ओर रमजान का पवित्र महीना चल रहा है तो दूसरी ओर सरहुल और रामनवमी की तैयारियां भी जोर पकड़ रही हैं. ऐसे समय में शहर की मुख्य सड़क का इस तरह अव्यवस्थित होना लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है.
नाली निर्माण के नाम पर सड़क को काटा गया
करीब एक महीने पहले नगर निकाय चुनाव की घोषणा के बाद इस सड़क पर नाली निर्माण का काम शुरू किया गया था. इसके लिए सड़क के बीचों-बीच दो जगहों को काट दिया गया. इसके बाद कछुआ की गति से पुलिया निर्माण का कार्य किया गया. हालांकि निर्माण कार्य अब लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी सड़क पर फैले मलबे को हटाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है. सड़क के दोनों किनारों पर मलबे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे सड़क काफी संकरी हो गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पथ निर्माण विभाग के संवेदक ने मनमाने तरीके से नाली निर्माण का कार्य कराया है. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी सड़क पर पड़े मलबे को हटाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे रोजाना लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
दुर्घटनाओं और जाम की बढ़ी समस्या
सड़क के किनारे पड़े मलबे के कारण यहां दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है. खासकर दोपहिया वाहन चालकों को काफी परेशानी हो रही है. कई बार थोड़ी सी लापरवाही के कारण बाइक चालक फिसलकर गिर जा रहे हैं. इसके अलावा सड़क संकरी होने के कारण यहां अक्सर जाम की स्थिति भी बन जाती है. थोड़ी सी भीड़ होने पर घंटों तक वाहनों की कतार लग जाती है. इससे स्कूल, कॉलेज और कार्यालय जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
अधिकारियों की नजर के सामने फिर भी अनदेखी
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सड़क कचहरी परिसर से होकर गुजरती है. इस रास्ते से रोजाना दर्जनों वकील, पुलिस अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी गुजरते हैं. नगर निगम के अधिकारी भी इसी रास्ते से अपने कार्यालय पहुंचते हैं. इसके बावजूद सड़क पर पड़े मलबे और बदइंतजामी की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी सब कुछ देखते हुए भी जानबूझकर इस समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं.
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नए मेयर से शहरवासियों को उम्मीद
हाल ही में नगर निगम चुनाव के बाद शहर को नया मेयर मिला है. युवा मेयर के रूप में चुने गए प्रतिनिधि को इस सड़क की दुर्दशा के बारे में पूरी जानकारी है. वे पेशे से वकील और पत्रकार भी रहे हैं, इसलिए लोगों को उम्मीद थी कि वे इस समस्या को प्राथमिकता देंगे. हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने से शहरवासियों में निराशा बढ़ रही है. लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही सड़क से मलबा नहीं हटाया गया तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है. फिलहाल शहरवासी प्रशासन से यही मांग कर रहे हैं कि सड़क पर फैले मलबे को जल्द से जल्द हटाया जाए और व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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