Jamshedpur News : टाटा मोटर्स व कमिंस में बंदी : आदित्यपुर के 90% उद्योगों पर संकट, दो लाख मजदूरों पर असर

Published by : RAJESH SINGH Updated At : 30 May 2026 12:57 AM

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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में 29 मई से (4 जून तक) आगामी सात दिनों के लिए उत्पादन पूरी तरह ठप होने का सीधा और बड़ा असर आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया पर पड़ना शुरू हो गया है.

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सात दिनों तक ठप रहेगा टाटा मोटर्स में उत्पादन, कमिंस ने भी लिया ब्लॉक क्लोजर व फ्लेक्सी ऑफ

ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली सहायक इकाइयों में पसरा सन्नाटा, उद्यमियों ने कहा- बढ़ी उत्पादन लागत, यह अलार्मिंग स्थिति

Jamshedpur News :

टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में 29 मई से (4 जून तक) आगामी सात दिनों के लिए उत्पादन पूरी तरह ठप होने का सीधा और बड़ा असर आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया पर पड़ना शुरू हो गया है. टाटा मोटर्स से कदमताल मिलाते हुए टाटा कमिंस ने भी 1 और 2 जून को ब्लॉक क्लोजर तथा 30 मई व 3 जून को फ्लेक्सी ऑफ की घोषणा कर दी है. इन दोनों दिग्गज कंपनियों में एक साथ उत्पादन ठप होने से आदित्यपुर की सहायक (एंसिलरी) कंपनियों के सामने कामकाज का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया (आयडा) का पूरा वजूद ही टाटा मोटर्स और कमिंस जैसी बड़ी कंपनियों पर टिका है. यहां की लगभग 90 प्रतिशत कंपनियां सीधे तौर पर इन दोनों बड़ी कंपनियों को फोर्जिंग, कास्टिंग, मशीनिंग, रिम, नट-बोल्ट, रबर और फाइबर के कलपुर्जों की सप्लाई करती है. पैरेंट कंपनियों में सात दिनों की बंदी होने के कारण अब इन सहायक इकाइयों में भी तैयार माल की आपूर्ति ठप हो गयी है. हालांकि गोविंदपुर स्थित स्टील स्ट्रिप्स व्हील्स कंपनी में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहेगा.

2 लाख परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा असर

ऑटोमोबाइल सेक्टर में आयी इस सुस्ती के कारण आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले 50,000 प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) मजदूर सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं. 1,50,000 अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) मजदूर और दिहाड़ी कामगारों के सामने रोजी-रोटी का संकट मंडराने लगा है.

पेंडिंग काम तो होंगे, पर 15% उद्योगों में काम पूरी तरह ठप : एसिया

उद्यमी संगठन एसिया के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल ने कहा कि ब्लॉक क्लोजर के दौरान यहां की कंपनियों में उत्पादन पूरी तरह शून्य नहीं होता है. कंपनियों को अपने पुराने पेंडिंग काम निपटाने का मौका मिल जाता है और कुछ अति आवश्यक कलपुर्जे तैयार किये जाते हैं. इसके बावजूद लगभग 10 से 15 प्रतिशत लघु उद्योग ऐसे हैं. जिनमें काम पूरी तरह ठप हो जाता है.

आपूर्ति रुकने से नुकसान, यह उद्यमियों के लिए चेतावनी : इसरो

उद्यमी संगठन इसरो के अध्यक्ष रूपेश कतरियार ने इसे उद्योग जगत के लिए एक चेतावनी बताया. उन्होंने कहा कि ब्लॉक क्लोजर के समय कंपनियां पूरी तरह भले ही न बंद हो, लेकिन मुख्य प्लांट में आपूर्ति पूरी तरह रुक जाने से यहां के उद्योगों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है. बाजार में उत्पादन लागत (प्रोडेक्शन कॉस्ट) पहले ही बढ़ी हुई है. ऐसे में बंदी उद्यमियों के लिए एक अलार्मिंग स्थिति (खतरे की घंटी) है.

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