Jamshedpur News : स्लैग चुनने से लेकर आईटीआई तक, मस्ती की पाठशाला की बेटियों ने रची सफलता की कहानी

Published by : RAJESH SINGH Updated At : 11 Oct 2025 12:55 AM

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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

Jamshedpur News : टाटा स्टील फाउंडेशन की पहल मस्ती की पाठशाला (एमकेपी) से जुड़ी 47 छात्राओं ने वर्ष 2025 में मैट्रिक की परीक्षा दी.

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Jamshedpur News :

टाटा स्टील फाउंडेशन की पहल मस्ती की पाठशाला (एमकेपी) से जुड़ी 47 छात्राओं ने वर्ष 2025 में मैट्रिक की परीक्षा दी. पूरे बैच में से तीन लड़कियों, अमृता, रेखा और स्मृति (परिवर्तित नाम) ने सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया. अमृता और रेखा ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किये, जबकि स्मृति ने 79 प्रतिशत अंक प्राप्त किया. लेकिन इनकी कहानी सिर्फ अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उस प्रेरणादायक सफर को बयां करती है, जो जमशेदपुर की गलियों से होकर गुजरती है. अमृता और रेखा ने खुद का और परिवार का पेट भरने के लिए स्लैग बीनने जैसे अस्थायी काम की. वहीं, स्मृति ने अपने माता-पिता को खो दिया था और अपनी बड़ी बहन के साथ रहकर प्लास्टिक की बोतलें इकट्ठा कर जीवन यापन कर रही थी. उनके दैनिक जीवन में शिक्षा की कोई जगह नहीं थी, क्योंकि उनका और उनके परिवार का पूरा दिन दो वक्त की रोटी जुटाने में ही बीत जाता था. स्मृति खुद और अपनी बहन के लिए खाने के पैसे जुटाने के लिए मॉल में फर्श भी पोछती थीं. जब मस्ती की पाठशाला की टीम सर्वे करने गयी, तो उन्होंने रेखा, स्मृति और अमृता को पहचाना और उन्हें शिक्षा के एक विकल्प के रूप में चुनने की संभावनाओं के बारे में बताया. कई दौर की काउंसेलिंग के बाद, तीनों ने आखिरकार मस्ती की पाठशाला में दाखिला लेने का निर्णय लिया. उन्होंने ब्रिज कोर्स से शुरुआत की और जल्द ही मुख्यधारा के स्कूलों में नामांकित होकर शिक्षा को अपनी प्रगति के मार्ग के रूप में अपनाया. शुरुआती संघर्षों के बावजूद, रेखा, अमृता और स्मृति ने धीरे-धीरे सीखना शुरू किया और अपने शैक्षणिक सफर में आगे बढ़ने लगीं. मैट्रिक परीक्षा में शानदार अंक से पास होने के बाद, तीनों ने ठान लिया कि वे शिक्षा का लाभ उठाकर अपने करियर को संवारेंगी. अब, मैट्रिक की अपनी पहली उपलब्धि के कुछ महीनों बाद, अमृता चांडिल के इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में सीएनसी कोर्स में दाखिला ले चुकी हैं. रेखा टाटा स्टील टेक्निकल इंस्टिट्यूट, बर्मामाइंस में इलेक्ट्रिकल ट्रेड का कोर्स कर रही हैं और स्मृति विज्ञान की पढ़ाई कर रही है. यह उनके भाग्य को बदलने और दुनिया में सफलता की नयी कहानी लिखने की शुरुआत है. मस्ती की पाठशाला टाटा स्टील फाउंडेशन का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत दस साल पहले स्कूल से बाहर के बच्चों को वापस स्कूल लाने के उद्देश्य से की गयी थी. 2024 में, एमकेपी के पहले बैच ने मैट्रिक परीक्षा पास की और इनमें से 10 बच्चे पहले ही अपने सपनों की नौकरी टाटा मार्कोपोलो, धारवाड़, कर्नाटक में कर रहे हैं. यह एक बड़ा मील का पत्थर था, क्योंकि एमकेपी के बच्चे कभी औपचारिक या प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाये थे और ब्रिज कोर्स ज्वाइन करने के बाद उन्हें सबकुछ शून्य से सीखना पड़ा. यह कार्यक्रम लगातार जमशेदपुर की सड़कों से बच्चों को स्कूल में शामिल होने और अपनी तक़दीर बदलने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है. इस संदर्भ में, मस्ती की पाठशाला ने अब तक जमशेदपुर के 139 बस्तियों में से 25 बस्तियों को बाल श्रम मुक्त क्षेत्र बनाने में मदद की है.

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