बाल संरक्षण पदाधिकारी रितेश कुमार की हृदय गति रुकने से मौत

Updated at : 24 Jan 2025 10:58 PM (IST)
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बाल संरक्षण पदाधिकारी रितेश कुमार की हृदय गति रुकने से मौत

सिस्टम पर उठ रहा है सवाल, पूर्व विधायक ने बताया विभाग की लापरवाही

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गोड्डा बाल संरक्षण पदाधिकारी रितेश कुमार की हार्ट अटैक से मौत हो गयी है. बिहार के सीतामढ़ी में एक शादी समारोह में शामिल होने गये रितेश कुमार की गुरुवार की देर रात अचानक गंभीर रूप से बीमार हो जाने के बाद इलाज के लिए ले जाने के क्रम में मौत हो गयी. परिजनों ने शव को पटना से लेकर पथरगामा पहुंचने के बाद प्रदेश प्रवक्ता सह पूर्व विधायक अमित मंडल सोनारचक गांव पहुंचकर परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त किया है. रितेश के इस स्थिति में मौत को लेकर श्री मंडल ने मामले का दोषी समाज कल्याण विभाग को बताया है. श्री मंडल ने कहा कि इस मौत का कारण सरासर विभाग की लापरवाही की वजह से हुई है. कहा कि आठ माह से रितेश कुमार का वेतन बंद कर दिया था. रितेश कुमार पर बगैर किसी भी प्रकार के चार्ज किये वेतन बंद कर उसे मानसिक व शारीरिक के साथ आर्थिक रूप से टार्चर करने का काम किया गया है. रितेश कुमार का पूरा परिवार पैसे-पैसे के लिए परेशान था, मगर उसकी किसी ने भी नहीं सुनी. पैसे के अभाव में उसकी बेहतर इलाज भी नहीं हो पा रही थी. बताया कि ना तो विभागीय पदाधिकारी व ना ही सरकार ने रितेश के जीवन के प्रति संवेदना दिखाने का काम किया. मौत ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया है. श्री मंडल ने उपायुक्त से मांग करते हुए सरकार को इस बात के लिए अगाह किया है कि रितेश कुमार से जुड़ी फाइलों की पड़ताल के साथ मामले की जांच कर दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज की अपील की है. कहा कि अगर मामले पर सरकार सुस्ती बरती तो उनके द्वारा आंदोलन किया जायेगा.

आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, डीसी से लगायी थी वेतन की गुहार

बाल संरक्षण पदाधिकारी रितेश कुमार ने 27 दिसंबर को डीसी जिशान कमर के नाम पत्र लिखा था, जिसमें अपनी परेशानियों से अवगत कराया था. आर्थिक परेशानी का जिक्र करते हुए वेतनादि के भुगतान की गुहार लगायी थी. साथ ही लिखा था कि उनका वेतन व मानदेय मई 2024 से विभागीय कारणों का हवाला देते हुए रोक दिया गया है. वहीं पूरे मामले से उनका लेना-देना नहीं था. समाज कल्याण विभाग को समय-समय पर कई बार मदद की गयी है. इसके बावजूद उनके वेतन को रोक दिया गया है. उससे उनकी बीमारी का इलाज भी नहीं हो रहा है. साथ ही परिवार का भरण पोषण भी मुश्किल हो गया है. परिस्थितियों को देखते हुए डीसी से वेतन रिलिज करने की गुहार लगायी गयी थी. इस आलोक में डीसी जिशान कमर के स्तर से 11 जनवरी को विभाग के सचिव के नाम डीसी ने पत्र प्रेषित करते हुए रितेश कुमार के पत्र का हवाला दिया है व रूके वेतनादि के भुगतान करने की अनुमति उनके स्तर से की गयी थी.

पटना में चल रहा था बाल संरक्षण पदाधिकारी का इलाज

बाल संरक्षण पदाधिकारी रितेश कुमार का उपचार पटना में किया जा रहा था. वे गर्दन से जुड़ी समस्या से जूझ रहे थे. गले के उपचार के लिए उनको पटना जाना जरूरी था. वेतन नहीं मिलने के कारण वे अपना इलाज नहीं करा पा रहे थे. स्व कुमार शुगर की परेशानियों से भी जूझ रहे थे. इधर रितेश कुमार की मौत ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

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