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Giridih News: नरसंहार के 18 वर्ष बाद भी चिलखारी नहीं बन पाया आदर्श गांव

Updated at : 25 Oct 2025 11:24 PM (IST)
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Giridih News: नरसंहार के 18 वर्ष बाद भी चिलखारी नहीं बन पाया आदर्श गांव

Giridih News: चिलखारी में नरसंहार की घटना के 18 बाद भी इसे आदर्श गांव के रूप में विकसित करने, गांव में स्टेडियम बनवाने एवं अन्य सुविधाओं का लाभ उपलब्ध करवाने का वादा पूरी नहीं हो पायी. घटना के बाद चिलखारी पहुंचे राजनेताओं के द्वारा कई घोषणाएं की गयी थीं. लेकिन, अभी यहां पर उचित विकास कार्य नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा है.

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झारखंड-बिहार की मध्य सीमा पर बसे देवरी प्रखंड अंतर्गत चहाल पंचायत के बुधुआडीह गांव के टोला चिलखारी में एक सौ भी अधिक आदिवासी परिवार रहते हैं. आदिवासी समाज के साथ साथ कुछ अन्य समाज के लोग भी इस गांव में रहते हैं. गांव के लोग पानी, सड़क, शिक्षा, सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं. गांव की सुनीता मरांडी, शोभन हेंब्रम, बड़की सोरेन, पार्वती बास्के, बड़की टुडू, सुदामा हेंब्रम, तालों मुर्मू, सुनीता हेंब्रम, गोपाल मुर्मू आदि का कहना है कि चिलखारी को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने का वादा किया गया था. लेकिन, गांव में समस्याएं जस की तस हैं. बुधुआडीह व चिलखारी गांव के बीच गुजरे नाले पर पुल नहीं रहने से आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अधिकांश लोगों को बिहार से अधिक दूरी तय कर पंचायत व प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ता है. आंगनबाड़ी केंद्र व पीडीएस दुकान जाने में भारी परेशानी हो रही है. गांव के सरकारी स्कूल के अपग्रेड नहीं हो पाने से बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. सिंचाई की सुविधा नहीं रहने से लोग पर्याप्त मात्रा में खेती नहीं कर पा रहे हैं. खरीफ फसल के बाद गांव में खेती नहीं हो पाती है. गांव के अधिकांश लोग मजदूरी पर आश्रित हैं. अधिकांश युवा महानगरों में मजदूरी करते हैं.

पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं लोग

गांव में ग्रामीणों को पेयजल संकट से भी जूझना पड़ रहा है. पेयजल के लिए महज दो चापाकल यहां लगवाये गये हैं, जिससे पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. पेयजल की समस्या को देखते हुए गांव में जल जीवन मिशन के तहत जलमीनार बनवाने व पाइपलाइन से घरों तक पानी पहुंचाने की मांग ग्रामीणों ने की है.

26 अक्तूबर 2007 की रात को याद कर आज भी सिहर जाते हैं ग्रामीण

चिलखारी नरसंहार के 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी लोग उस काली रात को याद कर सिहर उठते हैं. 26 अक्तूबर 2007 की रात में भाकपा माओवादियों द्वारा गोली मारकर लोगों की हत्या कर दी गयी थी, जिसमें देवरी की धरती पर दूसरी बार नरसंहार की घटना को अंजाम देकर रक्तरंजित कर दिया गया था. इस घटना में कुल बीस लोग मारे गए थे. बताया जाता है कि गांव स्थित मैदान में वार्षिक फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था. फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन के उपरांत रात्रि में आदिवासी जतरा कार्यक्रम सोरेन ओपेरा का आयोजन किया गया था. साजो सामान के साथ बोकारो से चिलखारी पहुंचे पचासी कलाकारों के दल के द्वारा जतरा प्रस्तुत किया जा रहा था. मध्य रात्रि में जब कार्यक्रम चरम पर था, उसी दरम्यान भाकपा माओवादियों के दस्ते ने कार्यक्रम स्थल को अपने कब्जे में ले लिया और इसके बाद अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरु कर दी. इस घटना में अगली पंक्ति में बैठकर कार्यक्रम देख रहे लोग मारे गए थे. इसमें पूर्व मुख्य्मंत्री बाबूलाल मरांडी के पुत्र अनूप मरांडी सहित छात्र नेता सुरेश हांसदा, अजय सिन्हा उर्फ पोपट (गिरिडीह), मुन्ना हेंब्रम (चिलखारी – बुधुआडीह), मनोज किस्कू (दुम्माटांड़ – बुधुआडीह ), रसिक बास्के, दिनेश वर्मा (बदवारा–बेंगाबाद), उसमान अंसारी (एक्दुआरी), अनिल अब्राहम मरांडी (करकाटांड़), सुशील सोरेन (पन्ना बिहार), केदार हेंब्रम (महतोधराण) सहित चरकू हेंब्रम, सोनाराम हेंब्रम, दीपक कुमार हेंब्रम, सुरेश टुडू, गंगाराम टुडू, अनूप मुर्मू व दिलखुश सिंह की मौत मौके पर हो गयी थी. घटना के दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक बीडी राम आदि घटनास्थल पर पहुंचे और मृतक के एक-एक आश्रितों को नौकरी, एक-एक लाख रुपये सहित इंदिरा आवास, लाल कार्ड व टोला चिलखरियोडीह में एक स्टेडियम का निर्माण करवाने की घोषणा की गयी थी. मृतक के परिजनों को आवास आदि की सुविधा दिलवाने की घोषणा की गयी थी. ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि नौकरी व मुआवजा राशि को छोड़ अन्य घोषणा अब तक पूरी नहीं हो पायी है. वहीं स्टेडियम निर्माण को लेकर पहल भी नहीं की गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MAYANK TIWARI

लेखक के बारे में

By MAYANK TIWARI

MAYANK TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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