गढ़वा में मानवता हुई शर्मशार, मां ने कर्ज नहीं चुकाया, तो नाबालिग को 14 दिनों तक बनाया बंधक

Updated at : 09 Mar 2024 1:48 PM (IST)
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गढ़वा में मानवता हुई शर्मशार, मां ने कर्ज नहीं चुकाया, तो नाबालिग को 14 दिनों तक बनाया बंधक

पुलिस ने नाबालिग की मां के आवेदन पर दो नामजद और एक अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज की है. पुलिस ने फाइनेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक निगम यादव को गिरफ्तार कर लिया है.

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गढ़वा : गढ़वा में समय पर कर्ज न चुका पाने की वजह से सेटिंग माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्मियों ने भवनाथपुर थाना क्षेत्र के रोहिनिया गांव निवासी संतोष राम और आशा देवी के 12 वर्षीय पुत्र अनीश कुमार को घर से अगवा कर लिया. आरोप है कि बच्चे को कंपनी की शाखा में 14 दिनों तक बंधक बना कर रखा गया. इस दौरान बच्चे से नौकरों वाले काम कराये जाते थे. वहीं, कंपनी के कर्मचारी बच्चे को धमकी देते थे कि अगर उसकी मां ने कर्ज नहीं चुकाया, तो उसकी आंखें और किडनी निकाल कर बेच देंगे.

हालांकि, श्री बंशीधर नगर एसडीपीओ सत्येंद्र नारायण सिंह और स्थानीय लोगों की पहल पर गुरुवार देर रात नाबालिग बच्चे को मुक्त कराया गया. पुलिस ने नाबालिग की मां के आवेदन पर दो नामजद और एक अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज की है. पुलिस ने फाइनेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक निगम यादव को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि, कर्मचारी उमाशंकर तिवारी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.

सेटिंग माइक्रो फाइनेंस कंपनी की शाखा श्री बंशीधर नगर शहर के हेन्हों मोड़ के निकट है. आशा देवी ने दो साल पहले समूह के माध्यम से इस कंपनी से 40 हजार रुपये कर्ज लिया था. इसमें से उन्होंने ने 22 हजार रुपये जमा कर दिये थे. 18 हजार रुपये बकाया रह गये थे. इस बकाया रकम को चुकाने के लिए फाइनेंस कंपनी का मैनेजर निगम यादव लगातार उन पर दबाव बना रहा था, लेकिन पैसों का जुगाड़ नहीं होने की वजह से वे कर्ज नहीं चुका पा रही थीं.

इधर, नाबालिग अनीश ने बताया कि दो हफ्ते पहले वह और उसकी बड़ी बहन घर में अकेले थे. उस दौरान बैंक के साहब लोग और उसकी मां को खोजने लगे. मां को खोजने के बहाने उन लोगों ने अनीश को गाड़ी पर बैठाया और नगर ऊंंटारी हेन्हों मोड़ के पास स्थित ब्रांच में ले गये, जहां उसे बंधक बना लिया गया. साथ ही उसकी मां को सूचना दी कि जब तक बकाया पैसे नहीं लौटाओगी, तब तक बेटा हमारे कब्जे में रहेगा.

गंदे कपड़े और जूठे बर्तन साफ कराते थे बच्चे से

अनीश ने बताया कि एक सप्ताह तक उसे ठीक से रखा गया. उसके बाद बैंक का कर्मचारी उमाशंकर तिवारी उसके साथ मारपीट करने लगा. कभी-कभी तो वह गला भी दबाने लगता था. उससे गंदे कपड़े और जूठे बर्तन साफ कराये जाते थे. शराब पीने के बाद उससे बोतलें भी फेंकवाते थे. उसे धमकी दी जाती थी कि तुम्हारी मां ने कर्ज नहीं चुकाया, तो तुम्हारी किडनी और आंखें निकाल कर बेच देंगे.

स्थानीय लोगों ने की पहल, मौके पर पहुंची पुलिस

दो सप्ताह बाद आशा देवी फाइनेंस कंपनी के कार्यालय में पहुंची और अपने बच्चे को छोड़ने की गुहार लगाने लगी. लेकिन, कंपनी के कर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी. गुरुवार को इसकी भनक जब स्थानीय लोगों को लगी, तो वे कंपनी की शाखा में पहुंचे और बच्चे को मुक्त करने का दबाव बनाने लगे. इस दौरान कंपनी के कर्मियों ने बच्चे की मां से 3000 रुपये भी लिये. इस बीच पुलिस को घटना की सूचना मिल गयी. एसडीपीओ सत्येंद्र नारायण सिंह के निर्देश पर पुलिस इंस्पेक्टर रतन कुमार सिंह और थाना प्रभारी आदित्य कुमार नायक तत्काल कंपनी के कार्यालय में पहुंचे और शाखा प्रबंधक निगम यादव को थाने ले जाकर पूछताछ की. बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

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