कैबिनेट के फैसले से सिर्फ सरकार का अहंकार बढ़ा: जेटेट और वंशीधर नगर के नाम पर भानु प्रताप शाही का हमला
Published by : Priya Gupta Updated At : 29 Apr 2026 6:08 PM
भानु प्रताप शाही
Garhwa News: झारखंड कैबिनेट के फैसलों पर सियासत तेज हो गई है, जेटेट से भाषाओं को हटाने और वंशीधर नगर नाम बदलाव पर भानु प्रताप शाही ने सरकार पर कड़ा हमला बोला. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड कैबिनेट के हालिया फैसलों को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है. जेटेट की सूची से क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखने और श्री वंशीधर नगर के नाम में बदलाव को लेकर विपक्ष ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है.
जेटेट से क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखने पर घेरा
पूर्व मंत्री सह भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने जेटेट की सूची से क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखने और श्री वंशीधर नगर के नाम में ‘उंटारी’ शब्द जोड़े जाने पर हेमंत सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि इन निर्णयों से जनता का कोई भला नहीं होने वाला, बल्कि यह केवल सत्ता के अहंकार की पूर्ति है. भानु प्रताप शाही ने जेटेट में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल नहीं किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि यह मांग केवल भाजपा की नहीं थी, बल्कि खुद मुख्यमंत्री की पार्टी के दिग्गज नेताओं ने भी उठाई थी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब झामुमो केंद्रीय महासचिव सह पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर और मंत्री दीपिका पांडेय सिंह जैसे नेता इसकी मांग कर रहे थे, तो कैबिनेट ने इसे अनसुना क्यों किया?
वित्त मंत्री पर तंज और नाम बदलने पर सवाल
कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के बीमार होने पर तंज कसते हुए भानु ने कहा वह वास्तव में बीमार हैं या मुख्यमंत्री का मूड भांपकर उन्होंने चुप्पी साध ली, यह जांच का विषय है. श्री वंशीधर नगर के नाम में ‘उंटारी’ शब्द जोड़े जाने को भानु प्रताप शाही ने विधायक अनंत प्रताप देव की ‘राजशाही आकांक्षा’ करार दिया. उन्होंने कहा कि देश से राजशाही 1954 में ही खत्म हो चुकी है. वर्ष 2017 में रघुवर सरकार ने श्री वंशीधर महोत्सव की शुरुआत के साथ इसे ‘श्री वंशीधर नगर’ का नाम दिया था, जो श्रद्धा और आस्था का प्रतीक था.
भौगोलिक तर्क और जनहित का मुद्दा
भानु ने भौगोलिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘नगर’ गढ़वा जिले में आता है, जबकि ‘उंटारी’ पलामू जिले का हिस्सा है. इसके बावजूद सिर्फ अपने पुराने रसूख और राजशाही पहचान को जिंदा रखने के लिए विधायक ने नाम में परिवर्तन करवाया है, जिससे आम जनता को कोई लाभ नहीं मिलने वाला. भाजपा नेता ने साफ कहा कि सरकार जनहित के मुद्दों को छोड़कर नाम बदलने और क्षेत्रीय भाषाओं के साथ भेदभाव करने में जुटी है.
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प्रिया गुप्ता डिजिटल मीडिया में कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हैं. वह पिछले एक साल से कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. इससे पहले वह नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में काम कर चुकी हैं. अभी वह झारखंड की खबरों पर काम करती हैं और SEO के अनुसार कंटेंट लिखती हैं. प्रिया आसान और साफ भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखती हैं. वह ट्रेंडिंग खबरों, झारखंड से जुड़े मुद्दों और लोगों से जुड़ी खबरों पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सही और भरोसेमंद जानकारी सरल शब्दों में मिले.
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