कैबिनेट के फैसले से सिर्फ सरकार का अहंकार बढ़ा: जेटेट और वंशीधर नगर के नाम पर भानु प्रताप शाही का हमला

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भानु प्रताप शाही

Garhwa News: झारखंड कैबिनेट के फैसलों पर सियासत तेज हो गई है, जेटेट से भाषाओं को हटाने और वंशीधर नगर नाम बदलाव पर भानु प्रताप शाही ने सरकार पर कड़ा हमला बोला. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट 

Garhwa News: झारखंड कैबिनेट के हालिया फैसलों को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है. जेटेट की सूची से क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखने और श्री वंशीधर नगर के नाम में बदलाव को लेकर विपक्ष ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है.

जेटेट से क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखने पर घेरा

पूर्व मंत्री सह भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने जेटेट की सूची से क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखने और श्री वंशीधर नगर के नाम में ‘उंटारी’ शब्द जोड़े जाने पर हेमंत सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि इन निर्णयों से जनता का कोई भला नहीं होने वाला, बल्कि यह केवल सत्ता के अहंकार की पूर्ति है. भानु प्रताप शाही ने जेटेट में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल नहीं किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि यह मांग केवल भाजपा की नहीं थी, बल्कि खुद मुख्यमंत्री की पार्टी के दिग्गज नेताओं ने भी उठाई थी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब झामुमो केंद्रीय महासचिव सह पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर और मंत्री दीपिका पांडेय सिंह जैसे नेता इसकी मांग कर रहे थे, तो कैबिनेट ने इसे अनसुना क्यों किया? 

वित्त मंत्री पर तंज और नाम बदलने पर सवाल

कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के बीमार होने पर तंज कसते हुए भानु ने कहा वह वास्तव में बीमार हैं या मुख्यमंत्री का मूड भांपकर उन्होंने चुप्पी साध ली, यह जांच का विषय है. श्री वंशीधर नगर के नाम में ‘उंटारी’ शब्द जोड़े जाने को भानु प्रताप शाही ने विधायक अनंत प्रताप देव की ‘राजशाही आकांक्षा’ करार दिया. उन्होंने कहा कि देश से राजशाही 1954 में ही खत्म हो चुकी है. वर्ष 2017 में रघुवर सरकार ने श्री वंशीधर महोत्सव की शुरुआत के साथ इसे ‘श्री वंशीधर नगर’ का नाम दिया था, जो श्रद्धा और आस्था का प्रतीक था. 

भौगोलिक तर्क और जनहित का मुद्दा

भानु ने भौगोलिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘नगर’ गढ़वा जिले में आता है, जबकि ‘उंटारी’ पलामू जिले का हिस्सा है. इसके बावजूद सिर्फ अपने पुराने रसूख और राजशाही पहचान को जिंदा रखने के लिए विधायक ने नाम में परिवर्तन करवाया है, जिससे आम जनता को कोई लाभ नहीं मिलने वाला. भाजपा नेता ने साफ कहा कि सरकार जनहित के मुद्दों को छोड़कर नाम बदलने और क्षेत्रीय भाषाओं के साथ भेदभाव करने में जुटी है.

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प्रिया गुप्ता

लेखक के बारे में

By प्रिया गुप्ता

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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