बनगोड़ा का मसजिदे जिया : कभी थी झोपड़ी

Published at :25 Jul 2013 3:55 AM (IST)
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बनगोड़ा का मसजिदे जिया : कभी थी झोपड़ी

मुसाबनी : बनगोड़ा के मसजिदे जिया की शुरुआत एक टाली की बनी झोपड़ी से हुई थी. स्थानीय लोग उक्त झोपड़ी में नमाज अदा करते थे. बरसात के दिनों में लोगों को परेशानी होती थी. बनगोड़ा के लोग जुम्मा का नमाज अदा करने जामा मसजिद बादिया जाते थे. स्थानीय लोगों ने एक भव्य मसजिद बनाने का […]

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मुसाबनी : बनगोड़ा के मसजिदे जिया की शुरुआत एक टाली की बनी झोपड़ी से हुई थी. स्थानीय लोग उक्त झोपड़ी में नमाज अदा करते थे. बरसात के दिनों में लोगों को परेशानी होती थी. बनगोड़ा के लोग जुम्मा का नमाज अदा करने जामा मसजिद बादिया जाते थे.

स्थानीय लोगों ने एक भव्य मसजिद बनाने का संकल्प लिया. 2003 में अंजुमन जियाउल इसलाम बनगोड़ा द्वारा मसजिदे जिया के भव्य तरीके से निर्माण शुरू किया. स्थानीय लोगों के चंदे से मसजिद का निर्माण 2006 में पूरा हुआ. मसजिदे जिया इस क्षेत्र का विशाल परिसर वाला मसजिद है.

मसजित में एक साथ पांच सौ लोग नमाज अदा कर सकते हैं. उक्त मसजिद का निर्माण पश्चिम बंगाल के आकर्टिक का सहयोग लिया गया. मसजिद का निर्माण शमशुदीन मिस्त्री द्वारा किया गया. उक्त मसजिद के लिए भूमि अफाजुद्दीन खान एवं शेख खुबुरूद्दीन ने मुहैया करायी है.

2008 से उक्त मसजिद में जुम्मे की नमाज अदा की जा रही है. अंजुमन जियाउल इसलाम बनगोड़ा के इस मसजिद में पहले सदर वशीर खान तथा सचिव अब्दुल रज्जाक थे. वर्तमान में मसजिद कमेटी के सदर हाजी बाबर खान तथा सचिव मो मोइनुद्दीन हैं.

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