ePaper

Dhanbad News : पेंच में फंसा प्रोन्नति का मामला, सीनिरय शिक्षक कौन

Updated at : 11 Dec 2024 12:45 AM (IST)
विज्ञापन
Dhanbad News : पेंच में फंसा प्रोन्नति का मामला, सीनिरय शिक्षक कौन

वरीय होते हुए भी शिक्षकों को 2015-16 में बहाल हुए शिक्षकों से कनीय बना देने की बात कही गयी, अदालत की शरण में हैं शिक्षक

विज्ञापन

स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षकों की प्रोन्नति पर रोक लग गयी है. प्राथमिक शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 1993 के आलोक में ग्रेड-7 में प्रोन्नति के लिए जिले में कार्यरत स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षकों की औपबंधिक वरीयता सूची में जूनियर शिक्षकों को वरीय बना देने के कारण प्रोन्नति पर रोक लगी है. इससे शिक्षकों में रोष है. इस सूची में 1987-88, 1994, 1999, 2000 व 2003 से कार्यरत शिक्षकों के साथ नाइंसाफी हुई है. वरीय होते हुए भी शिक्षकों को 2015-16 में बहाल हुए शिक्षकों से कनीय बना देने की बात कही गयी. इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर किया गया. शिक्षकों ने कहा कि प्रोन्नति नियमावली 1993 उन शिक्षकों के लिए है, जो शुरुआती ग्रेड में बहाल हुए है, जबकि 2015-16 में बहाल हुए शिक्षकों का ग्रेड-4 है इसमें नियम लागू नहीं होते है. इनके लिए अलग नियमावली बनायी जानी चाहिए.

भूतलक्षी प्रभाव से नहीं मिली शिक्षकों को प्रोन्नति, हो गये जूनियर :

शिक्षा विभाग ने 2004 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को समय पर प्रोन्नति नहीं दी है. विभाग की लापरवाही के कारण प्रोन्नति के अभाव में कई शिक्षक सेवानिवृत्त हो गये है. नियमानुसार प्रोन्नति मिलती, तो सभी विद्यालयों में प्रधानाध्यापक होते, प्रभार की जरूरत नहीं होती. 237 शिक्षक है, जिनको ग्रेड-7 में प्रोन्नति मिलनी चाहिए. लेकिन 2023 में शिक्षकों को ग्रेड-4 में प्रोन्नति दी गयी है, ग्रेड-4 में पांच साल कार्यरत रहने के बाद ही ग्रेड-7 में प्रोन्नति के हकदार होते हैं. यही कारण है कि शिक्षक भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति की मांग करते रहे हैं, ताकि ग्रेड-7 प्रोन्नति का लाभ उन्हें मिल सके. जबकि 2015-16 में ग्रेड-4 में बहाल हुए शिक्षक ग्रेड-7 में प्रोन्नति के हकदार हो चुके. इसी को लेकर दोनों कोर्ट की शरण में है.

प्रोन्नति पर फैसला आने तक रोक :

शिक्षकों के ग्रेड-7 में प्रोन्नति के लिए वरीयता सूची पर रोक लगाने की अपील अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की है. संघ ने बताया कि झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा एलपीए 482/2023 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए सुधीर कुमार दुबे व अन्य द्वारा दायर एसएलपी याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश विक्रम नाथ और प्रसन्ना बी वारले की पीठ ने याचिका को स्वीकार कर प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले का निस्तारण होने तक प्रधानाध्यापक पद की प्रोन्नति पर यथा स्थिति बनाए रखते का आदेश पारित किया है. आदेश के अनुसार प्रधानाध्यापक पद पर प्रोन्नति पर फिलहाल रोक रहेगी.

ये हैं याचिकाकर्ता :

याचिकाकर्ता सुधीर कुमार दुबे एवं अन्य की ओर उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता परमजीत सिंह पटवालिया और अधिवक्ता आरके सिंह ने पक्ष प्रस्तुत किया, जिसे न्यायाधीशों की पीठ ने स्वीकृत करते हुए यह आदेश पारित किया. अपील करने वालों में प्रदेश अध्यक्ष अनूप कुमार केशरी, प्रदेश महासचिव राममूर्ति ठाकुर, जिलाध्यक्ष सुनील भगत, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय कुमार, राजकुमार वर्मा, उपाध्यक्ष रामलखन कुमार, नीरज मिश्रा, महासचिव सियाराम सिंह, संगठन मंत्री मदन मोहन, विनय रंजन तिवारी महतो जिला प्रवक्ता प्रसन्नजीत मुखर्जी आदि हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola