निशिकांत दुबे का हेमंत सरकार पर बड़ा हमला, बोले- एनडीए के साथ मिलकर काम करना मजबूरी

देवघर में अपने आवास पर जरूरतमंदों की समस्या का समाधान करते निशिकांत दुबे. फोटो: प्रभात खबर
Nishikant Dubey Statement: गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर हेमंत सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि झारखंड चारों ओर से एनडीए शासित राज्यों से घिरा है, इसलिए राज्य सरकार को केंद्र के साथ मिलकर काम करना उसकी मजबूरी बन गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
देवघर से अमरनाथ पोद्दार की रिपोर्ट
Nishikant Dubey Statement: गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर बड़ा हमला बोला है. देवघर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की सरकार बनने के बाद संथाल परगना क्षेत्र में घुसपैठियों की गतिविधियां और तेजी से बढ़ सकती हैं. ऐसी स्थिति में झारखंड सरकार को केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना ही होगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लंबे समय से बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं और इस मुद्दे की गंभीरता को अच्छी तरह समझते हैं.
सहयोग नहीं करने पर कारोबार रोकने की चेतावनी
सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि झारखंड सरकार केंद्र का सहयोग नहीं करती है तो राज्य से गिट्टी, बालू और शराब के गैर कानूनी कारोबार पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड से पश्चिम बंगाल और बिहार के रास्ते अवैध तरीके से गिट्टी और बालू की सप्लाई की जाती है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय जरूरी है. अगर राज्य सरकार सहयोग नहीं करती है तो केंद्र स्तर पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.
झारखंड चारों तरफ से एनडीए शासित राज्यों से घिरा
निशिकांत दुबे ने कहा कि झारखंड चारों ओर से एनडीए शासित राज्यों से घिरा हुआ है. बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भाजपा या एनडीए की सरकार है. ऐसे में हेमंत सरकार के लिए एनडीए के साथ मिलकर काम करना मजबूरी बन गई है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है. खासकर सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ और गैर कानूनी गतिविधियों पर सख्ती जरूरी है.
संथाल परगना में जनसंख्या संतुलन बिगड़ने का दावा
भाजपा सांसद ने दावा किया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों ने संथाल परगना के कई इलाकों में जमीनों पर कब्जा कर लिया है. उन्होंने कहा कि इसी कारण क्षेत्र में आदिवासी आबादी का प्रतिशत 45 से घटकर 24 प्रतिशत तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सामाजिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है. इस पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
ममता बनर्जी और बंगाल सरकार पर भी साधा निशाना
निशिकांत दुबे ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्हें संविधान के दायरे में रहकर काम करना होगा और हर हाल में जवाबदेही तय करनी होगी. उन्होंने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में अंतरराष्ट्रीय अपराध सक्रिय हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.
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देवघर और बंगाल के सांस्कृतिक संबंधों का किया उल्लेख
अपने बयान के दौरान निशिकांत दुबे ने देवघर और पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, महर्षि अरविंद और आरएन बोस जैसे महापुरुषों का देवघर से गहरा जुड़ाव रहा है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की राजनीतिक मजबूती से देवघर और संथाल परगना के लोगों में भी उत्साह का माहौल है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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