पलामू के जीएलए और जेएस कॉलेज में बंद होगी आर्ट्स की पढ़ाई, चैनपुर मॉडल डिग्री कॉलेज में होगी शुरुआत

पलामू का नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और इनसेट में वीसी डॉ दिनेश सिंह. फोटो: प्रभात खबर
Palamu News: पलामू के जीएलए और जेएस कॉलेज में यूजी आर्ट्स की पढ़ाई बंद करने की तैयारी है. चैनपुर मॉडल डिग्री कॉलेज में आर्ट्स और भवनाथपुर में आर्ट्स- कॉमर्स शुरू होंगे. विश्वविद्यालय प्रशासन ने विषय आधारित नई शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए एचआरडी को प्रस्ताव भेजा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
पलामू से शिवेंद्र कुमार की रिपोर्ट
Palamu News: झारखंड के पलामू जिले में उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय प्रशासन बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गया है. विश्वविद्यालय से संबद्ध गणेश लाल अग्रवाल (जीएलए) कॉलेज और जनता शिवरात्रि महाविद्यालय (जेएस कॉलेज) में स्नातक स्तर पर आर्ट्स की पढ़ाई बंद करने की योजना बनाई गई है. इसके बदले चैनपुर स्थित मॉडल डिग्री कॉलेज में यूजी आर्ट्स की पढ़ाई शुरू की जाएगी. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि विषयवार कॉलेजों को व्यवस्थित करने से छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी.
जीएलए कॉलेज में सिर्फ साइंस की पढ़ाई
वर्तमान में जीएलए कॉलेज में यूजी साइंस और आर्ट्स दोनों संकायों की पढ़ाई होती है. लेकिन प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत यहां केवल साइंस विषय की पढ़ाई संचालित होगी. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए मानव संसाधन विकास विभाग (एचआरडी) को पत्र भेज दिया है. विश्वविद्यालय के कुलपति (वीसी) डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि कॉलेजों में विषय आधारित व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि एचआरडी से स्वीकृति मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी.
जेएस कॉलेज में कॉमर्स और मैनेजमेंट पर रहेगा फोकस
जनता शिवरात्रि महाविद्यालय (जेएस कॉलेज) में अभी स्नातक स्तर पर आर्ट्स और कॉमर्स दोनों विषयों की पढ़ाई होती है. प्रस्तावित बदलाव के बाद यहां केवल कॉमर्स और मैनेजमेंट की पढ़ाई कराई जाएगी. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अलग-अलग कॉलेजों में विषयों का विशेषीकरण करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी.
चैनपुर मॉडल डिग्री कॉलेज में शुरू होगी आर्ट्स की पढ़ाई
चैनपुर स्थित मॉडल डिग्री कॉलेज को नए शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है. यहां यूजी आर्ट्स की पढ़ाई शुरू की जाएगी. इसके साथ ही भवनाथपुर मॉडल डिग्री कॉलेज में आर्ट्स और कॉमर्स दोनों विषयों की पढ़ाई शुरू कराने की योजना है. वीसी डॉ दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि चैनपुर मॉडल डिग्री कॉलेज 10 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. कॉलेज की बाउंड्री निर्माण के लिए एस्टीमेट तैयार करने का निर्देश दिया गया है. इसके बाद प्रस्ताव एचआरडी को भेजा जाएगा ताकि फंड जारी किया जा सके. उन्होंने कहा कि मॉडल डिग्री कॉलेजों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सके.
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अंगीभूत कॉलेजों में बंद होगी पीजी की पढ़ाई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातकोत्तर (पीजी) शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है. कुलपति ने बताया कि वर्तमान में जिन अंगीभूत कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई संचालित हो रही है, उसे बंद करने की योजना है. इसके बदले सभी विषयों की पीजी की पढ़ाई सीधे विश्वविद्यालय परिसर में कराई जाएगी. विश्वविद्यालय में सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर सकें. डॉ सिंह ने कहा कि इस संबंध में भी एचआरडी को पत्र भेजा गया है. स्वीकृति मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू होगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय परिसर में पीजी की पढ़ाई के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है और छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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