यहां चलते हैं सरकारी कार्यालय

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Feb 2016 4:25 AM

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स्टेडियम परिसर में अग्निशमन, उत्पाद व भूदान कार्यालय का संचालन किया जा रहा सुपौल : करोड़ों की लागत से निर्मित जिला मुख्यालय का एकमात्र स्टेडियम सुविधाओं के अभाव में अनुपयोगी साबित हो रहा है़ करीब दो दशक पूर्व जब उक्त स्टेडियम का निर्माण हुआ था तो खिलािड़यों व क्रीड़ा प्रेमियों में उम्मीद जगी थी कि […]

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स्टेडियम परिसर में अग्निशमन, उत्पाद व भूदान कार्यालय का संचालन किया जा रहा

सुपौल : करोड़ों की लागत से निर्मित जिला मुख्यालय का एकमात्र स्टेडियम सुविधाओं के अभाव में अनुपयोगी साबित हो रहा है़ करीब दो दशक पूर्व जब उक्त स्टेडियम का निर्माण हुआ था तो खिलािड़यों व क्रीड़ा प्रेमियों में उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें स्थानीय स्तर पर खेल की आधुनिक सुविधाएं व खेलने के लिए एक अच्छा सा मैदान उपलब्ध हो जायेगा़
पर, निर्माण के वर्षों बाद भी स्टेडियम का न तो आधुनिकीकरण किया गया और न ही यहां खेल संबंधी सुविधाएं मुहैया करायी गयी़ं इससे खिलाड़ियों के मंसूबे पर पानी फिरता नजर आ रहा है़ आलम यह है कि प्रशासन द्वारा स्टेडियम का उपयोग खेल के बजाय अन्य कई कार्यों के लिए किया जाता है़ इससे खिलाड़ियों में असंतोष व्याप्त है़
मालूम हो कि जिला मुख्यालय में खिलाड़ियों के अभ्यास व बडे टूर्नामेंट के आयोजन के लिए जगह का घोर अभाव है़ कई तरह के निर्माण की वजह से ऐतिहासिक गांधी मैदान दिन ब दिन सिकुड़ता जा रहा है़ वहीं विलियम्स स्कूल मैदान भी देखरेख के अभाव में बेकार पड़ा है़
यहां खेल के अलावा सब कुछ होता है
गौरतलब है कि निर्माण काल के बाद से ही मैदान को उन्नत बनाने व खेल के विभिन्न स्पर्धाओं के विकास के लिए कोई भी प्रशासनिक पहल नहीं की गयी़ उल्टे स्टेडियम परिसर में कई विभाग के कार्यालय की स्थापना व अन्य गतिविधियां प्रारंभ कर दी गयी़ं फिलहाल में स्टेडियम परिसर में अग्निशमन, उत्पाद व भूदान कार्यालय का संचालन किया जा रहा है़ इसके अलावा मैदान का उपयोग दमकल की गाडी खड़ी करने व आपदा विभाग द्वारा नाव आदि रखने के लिए किया जा रहा है़
अनाज का भी होता है भंडारण
किसानों से क्रय किये गये अनाज का भी अक्सर यहां भंडारण किया जाता है़ वहीं परिवहन विभाग द्वारा भी अनुज्ञप्ति के लिए चालकों का ड्राइविंग टेस्ट यहीं किया जाता है़ कुल मिला कर स्थिति यह है कि खेल के अलावा यहां अनेक प्रकार की गतिविधियां संचालित की जाती है़ंस्टेडियम परिसर में जारी अन्यान गतिविधियों की वजह से यहां का खेल मैदान जर्जर होता जा रहा है़
दमकल व अन्य भाडी वाहन तथा वाहन चालकों के टेस्ट की वजह से मैदान में बडे-बडे गड्ढे बन चुके है़ं नतीजतन चाह कर भी खिलाडी यहां खेलने से कतराने लगे है़ं
रखरखाव के अभाव में जर्जर हो रहा भवन
निर्माण के बाद से ही स्टेडियम के रखरखाव व देखरेख की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गयी है़ जिससे स्टेडियम भवन व दर्शक स्टैंड जर्जर होता जा रहा है़ हालांकि निर्माण काल से ही अंदरूनी हिस्से के कई भागों में दर्शक दीर्घा स्टैंड का निर्माण अधूरा पडा है़ जो स्टैंड बने भी थे वह मरम्मत के अभाव में जर्जर होते जा रहे है़ं
बेकार पड़ी है लाखों की खेल सामग्री
मालूम हो कि पूर्व के जिलाधिकारी कुमार रवि के कार्यकाल में स्टेडियम हेतु लाखों रुपये की खेल सामग्री खरीद की गयी थी़ जिसमें क्रिकेट व एथलेटिक्स आदि के सामान शामिल है़ं] लेकिन यह सामग्री न तो अब तक खिलाड़ियों को उपलब्ध करायी गयी और न ही इसके उपयोग के लिए कोई नीति बनायी गयी़ परिणाम है कि लाखों रुपये मूल्य की क्रीड़ा सामग्री स्टेडियम के गोदाम में सड़ रही है़ जबकि खेल संघों द्वारा खिलाड़ियों के उपयोग के लिए उक्त सामान की कई बार मांग की जा चुकी है़
स्टेडियम के पुनरुद्धार की मांग
डीसीए के जिला सचिव शशि भूषण सिंह, फुटबॉल संघ के अध्यक्ष सर्वेश झा व सचिव सुमन कुमार सिंह, एथलेटिक्स संघ के नगेंद्र चौधरी आदि ने जिला प्रशासन से स्टेडियम के पुनरुद्धार एवं इसका उपयोग सिर्फ खेल के लिए करने की मांग की है़ खेल सामग्री को खिलाड़ियों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है़
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