345 को दोबारा भरना पड़ेगा परीक्षा फॉर्म

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Jan 2016 7:05 PM

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345 को दोबारा भरना पड़ेगा परीक्षा फॉर्म फोटो-10 डीएम से मिलने पहुंचे परीक्षार्थी. दो प्राचार्य के विवाद में परीक्षार्थियों का एक सत्र बरबाद डीइओ की रिपोर्ट पर बोर्ड ने भी साध ली चुप्पी सीतामढ़ी. एमके कॉलेज, भुतही एक बार फिर तब चर्चा में आ गया, जब वहां के इंटर के दर्जन भर छात्र गुरुवार को […]

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345 को दोबारा भरना पड़ेगा परीक्षा फॉर्म फोटो-10 डीएम से मिलने पहुंचे परीक्षार्थी. दो प्राचार्य के विवाद में परीक्षार्थियों का एक सत्र बरबाद डीइओ की रिपोर्ट पर बोर्ड ने भी साध ली चुप्पी सीतामढ़ी. एमके कॉलेज, भुतही एक बार फिर तब चर्चा में आ गया, जब वहां के इंटर के दर्जन भर छात्र गुरुवार को डीएम के जनता दरबार में पहुंचे. बावजूद छात्रों को न्याय नहीं मिला. डीएम राजीव रौशन के स्तर से कोशिश की गयी, पर छात्रों को कोई लाभ नहीं मिला. डीइओ व डीएम से मिलने के बाद निराश होकर सभी छात्र लौट गये. क्या है पूरा मामला उक्त कॉलेज के इंटर विज्ञान, वाणिज्य व कला संकाय की परीक्षा में 2007 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिसमें उक्त परीक्षार्थी भी शामिल थे. बाद में दो प्राचार्य के बीच विवाद उत्पन्न हो गया. एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप लगाये जाने लगा. कॉलेज के अध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप लगे थे. डीइओ, डीएम व सदर एसडीओ तक मामला पहुंचा था. यहां तक कि डीइओ ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को 27 जून 15 को पत्र भेज उक्त विवाद से अवगत कराया था. साथ ही कहा था कि विवाद के चलते 345 परीक्षार्थियों का सत्र बेकार होने के कगार पर हैं. बावजूद बोर्ड के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी. यानी बोर्ड के संबंधित अधिकारी हाथ पर हाथ रख बैठे रह गये. बोर्ड से डीइओ को यह नहीं बताया गया कि उनके पत्र के आलोक में कौन सी कार्रवाई की जा रही है. यह स्थिति आज तक बनी हुई है. बताया गया है कि दोनों प्राचार्य दो गुटों का नेतृत्व कर रहे थे. एक गुट को उक्त 345 परीक्षार्थियों ने परीक्षा व निबंधन का शुल्क जमा किया था. 345 ने परीक्षा दिया, पर बाद में पूरे कॉलेज की बागडोर दूसरे गुट के हाथों में आ गयी. इस दूसरे गुट ने उक्त 345 को प्रायोगिक परीक्षा से वंचित कर दिया गया. यह कहते हुए कि परीक्षा के दौरान अनुपस्थित रहे थे. वंचित परीक्षार्थियों ने डीइओ से शिकायत की थी कि पूर्व प्राचार्य द्वारा सुविधा शुल्क के नाम पर प्रति छात्र 500 से 700 रुपये वसूल किया जा रहा है. इसका विरोध करने पर उन सबों को प्रायोगिक परीक्षा में शामिल होने के बावजूद अनुपस्थित करार देकर इस परीक्षा से वंचित कर दिया गया. खास बात यह कि डीइओ ने बोर्ड को जो रिपोर्ट की थी, उसके साथ परीक्षार्थियों द्वारा दिये गये आवेदन एवं सुविधा शुल्क की रसीद की छाया प्रति भी भेजी थी. तत्कालीन डीइओ सुरेश कुमार सिंह ने बोर्ड के सचिव से उक्त 345 परीक्षार्थियों के हित में पुन: प्रायोगिक परीक्षा का आयोजन करा उसमें शामिल कराने की अनुशंसा की थी. डीएम से मिले परीक्षार्थी मंजेश कुमार, सुशील कुमार, अशोक कुमार, चंदन कुमार, रामकुमार ठाकुर, सरोज कुमार, सत्यम पाठक, मनीष कुमार, अमित कुमार व अजय कुमार ने गुरुवार को डीएम के जनता दरबार में पहुंच शिकायत की. डीएम ने वहां मौजूद डीपीओ को डीइओ से बात कर तीन बजे तक निष्कर्ष से अवगत कराने को कहा. प्रभारी डीइओ इफ्तेखार अहमद ने एमके कॉलेज के प्राचार्य को कार्यालय में तलब किया. प्राचार्य ने स्पष्ट कहा कि उक्त परीक्षार्थियों को पुन: फॉर्म भरने के सिवा कोई उपाय नहीं है. यह निर्णय सुन सभी परीक्षार्थी निराश होकर लौट गये.

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