बंगाल में नौकरशाही का शुद्धिकरण, नबान्न से तृणमूल समर्थक अफसरों को बाहर कर रहे शुभेंदु अधिकारी

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 12 Jun 2026 7:07 AM

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी.

West Bengal ‍Bureaucracy De-trinamoolisation: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में मचे घमासान के बीच शुभेंदु अधिकारी सरकार ने नौकरशाही का चुपचाप डी-तृणमूलिफिकेशन (De-Trinamoolisation) शुरू कर दिया है. ममता सरकार के पसंदीदा आईएएस-आईपीएस अफसरों को सचिवालय से बाहर किया जा रहा है.

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West Bengal ‍Bureaucracy De-Trinamoolisation: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सरकार ने नबान्न (सचिवालय) से नौकरशाही का डी-तृणमूलिफिकेशन (De-Trinamoolisation) शुरू कर दिया है. इसका मतलब यह है कि तृणमूल समर्थक और ममता बनर्जी के वफादार आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाया जा रहा है.

मलाईदार पदों पर बैठे अफसरों में हड़कंप

शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी को पूर्ववर्ती सिंडिकेट के चंगुल से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए ‘360-डिग्री व्यू’ रणनीति के तहत एक्शन लेना शुरू किया है, जिससे सालों से मलाईदार पदों पर बैठे अफसरों में हड़कंप मच गया है.

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West Bengal ‍Bureaucracy De-Trinamoolisation: बदले जा रहे हैं ममता के पसंदीदा चेहरे

प्रशासनिक सूत्रों की मानें, तो ममता बनर्जी सरकार के दौरान जो शीर्ष नौकरशाह नीति-निर्धारण से लेकर गृह और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर एकछत्र राज कर रहे थे, उन्हें गैर-महत्वपूर्ण विभागों में ट्रांसफर किया जा रहा है. नयी सरकार उन ईमानदार आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को मुख्यधारा में वापस ला रही है, जिन्हें टीएमसी शासन में कथित तौर पर प्रताड़ित या दरकिनार किया गया था. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे अनुभवी अधिकारियों को गृह, विजिलेंस और जिला मजिस्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण पद दिये जा रहे हैं.

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पुलिस-नेक्सस पर शुभेंदु सरकार का कड़ा प्रहार

खुफिया विभाग (IB) से मिले गुप्त इनपुट्स के बाद उन पुलिस कप्तानों (SPs) और कमिश्नरों की एक लिस्ट तैयार की गयी है, जिन पर पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ दल के नेताओं और सिंडिकेट माफिया को कथित रूप से खुला संरक्षण देने का आरोप था. सूत्रों का दावा है कि सिर्फ तबादले ही नहीं, बल्कि कुछ दागी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं की गुप्त विजिलेंस जांच भी शुरू हो सकती है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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