खुले में मांस की बक्रिी करने वालों पर शिकंजा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jan 2016 8:44 PM
खुले में मांस की बिक्री करने वालों पर शिकंजा फोटो-21 मेहसौल चौक वाली रोड में मार कर बिना ढ़के टांगा बकरा — सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार व प्रशासन की नींद खुली — अधिनियम का अनुपालन नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला सीतामढ़ी : शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में […]
खुले में मांस की बिक्री करने वालों पर शिकंजा फोटो-21 मेहसौल चौक वाली रोड में मार कर बिना ढ़के टांगा बकरा — सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार व प्रशासन की नींद खुली — अधिनियम का अनुपालन नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला सीतामढ़ी : शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में मांस व मुरगा की बिक्री की जाती है, जबकि इस काम को व्यवस्थित ढ़ंग से करना है, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है. मांस व मुरगा की बिक्री व्यवस्थित ढ़ंग से करने के लिए वर्षों पूर्व राज्य सरकार ने अधिनियम बनाया था और जिन पर अधिनियम का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी थी वे इस पर गंभीर नहीं रहे. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकार के साथ-साथ जिला का प्रशासनिक व पुलिस महकमा भी गंभीर हुआ है. — सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला खुलेआम मांस की बिक्री व पशुओं को काटे जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में तीन रीट याचिकाएं दायर की गयी थी. तीनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी बिक्री को व्यवस्थित ढ़ंग से कराने का आदेश दिया. उक्त आदेश के आलोक में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने सभी डीएम को पत्र भेज आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है. — सरकार का है कहना प्रधान सचिव श्री मीणा ने कहा है कि सड़क किनारे जगह-जगह खुले में पशु मांस, मुरगा व मछली की बिक्री अवैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है. इसमें सुधार की आवश्यकता है. यह जनहित में अति आवश्यक है, क्योंकि सड़क किनारे/फुटपाथ पर पशु मांस की अमानवीय रूप से बिक्री से जनमानस पर कुप्रभाव पड़ता है और यह सामाजिक विकृति के द्योतक है. — यहां पर नहीं रहेंगे दुकान सरकार ने बिहार नागरपालिका अधिनियम 2007 की याद दिला जिला प्रशासन को उसके आलोक में ठोस कदम उठाने को कहा है. कहा गया है कि स्कूल व धार्मिक स्थलों के समीप मीट-मछली की दुकानों को नहीं खोला जाये. यदि हो तो उसे तुरंत हटा दिया जाये. सरकार ने पशु मांस व मुरगा बिक्री स्थल को काले कपड़े लटका कर ढ़कने के लिए विक्रेताओं पर शिकंजा कसने को कहा है ताकि मिट-मछली लोगों की नजरों से ओझल रहे. — सार्वजनिक स्थल पर वध न हो सरकार ने किसी भी पशु का वध सार्वजनिक जगह या खुले स्थानों पर नहीं हो, को सुनिश्चित कराने को कहा है. सरकार का कहना है कि पशुओं का वध ऐसे स्थानों पर हो, जिसे लोग आसानी से नहीं देख सके. प्रधान सचिव के पत्र के आलोक में डीएम राजीव रौशन ने एसपी, सभी एसडीओ, डीएसपी, बीडीओ, सीओ व शहर क्षेत्रों के कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र भेज आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है. — खुलेआम बिक्री को नगर निकाय दोषी शहरों में सड़कों के किनारे बिना ढ़के हुए मिट-मछली को रखा जाता है. ऐसे दुकानदारों को नगर निकायों का अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग मिलता है. कारण कि नगर विकास एवं आवास विभाग ने वर्ष 2007 में हीं अधिनियम पास किया था और धारा 245, 250 व 345 के तहत पशु मांस उत्पादों को निर्धारित मानकों के अंतर्गत विक्रय व्यवस्था की जांच के लिए नगर निकायों को शक्ति प्रदान की थी. शर्मनाक बात यह है कि नगर निकायों को अपनी इस शक्ति का न तो याद है और न हीं एहसास. जानकारों का कहना है कि विभागीय अधिकारी को सब कुछ मालूम है, बावजूद कोई कार्रवाई करने के बजाय खामोश रहते हैं. इसके पीछे के सच को शायद सब जानते होंगे. — मंदिर के समीप बिक्री बराबर मंदिर व स्कूलों के समीप मिट-मछली की बिक्री पर रोक लगाने की मांग उठती रही है, पर प्रशासन के लोग तभी सुनते हैं और जागते हैं जब वरीय के स्तर से कोई आदेश व निर्देश मिलता है. शहर स्थित राजोपट्टी शंकर मंदिर के समीप वर्षों से प्रतिदिन सुबह-शाम दर्जन से अधिक विक्रेताओं द्वारा मछली की बिक्री की जाती रही है. अधिकारी भी देखते हैं, लेकिन कतिपय कारणों से कोई कार्रवाई नहीं कर पाते हैं.
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