माता, पिता व गुरु की सेवा बहुमूल्य धर्म

Published at :19 Jan 2016 8:20 PM (IST)
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माता, पिता व गुरु की सेवा बहुमूल्य धर्म

माता, पिता व गुरु की सेवा बहुमूल्य धर्म नोट. फोटो नंबर 19 सीएचपी 11 व 12 है. कैप्सन होगा- प्रवचन करतीं साध्वी प्रिया व उपस्थित श्रद्धालु नगरा. माता-पिता व गुरु की सेवा ही धर्म है. भक्ति में शक्ति है. मनुष्य को माता-पिता व गुरु की तन-मन, धन से सेवा करनी चाहिए. उक्त बातें छपरा से […]

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माता, पिता व गुरु की सेवा बहुमूल्य धर्म नोट. फोटो नंबर 19 सीएचपी 11 व 12 है. कैप्सन होगा- प्रवचन करतीं साध्वी प्रिया व उपस्थित श्रद्धालु नगरा. माता-पिता व गुरु की सेवा ही धर्म है. भक्ति में शक्ति है. मनुष्य को माता-पिता व गुरु की तन-मन, धन से सेवा करनी चाहिए. उक्त बातें छपरा से आयीं साध्वी प्रिया कुमारी प्रभाकर ने नगरा बाजार स्थित शिव मंदिर परिसर में 32 वें वार्षिक सत्संग सम्मेलन में कहीं. उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में अधिकांश स्थानों पर इस चरितार्थ का उल्लेख किया गया है. भगवान श्री राम, पवन पुत्र हनुमान, माता सीता, माता अंजनी आदि देवी-देवताओं ने भी माता-पिता व गुरु की सच्ची सेवा ही धर्म है, जो रामचरित मानस में उल्लेखित है. संसार में पवन पुत्र हनुमान की बलवंता की सच्ची चर्चा होती है. उक्त सत्संग में देश के कोने-कोने से प्रवचनकर्ता वृंदावन भरत दास जी महाराज, खलीलाबाद से वैराग्यानंद जी महाराज, देवघर से नागेंद्र शास्त्री जी, सारण के राजदेव बाबू, राजेश्वर दास जी, विंधनाथ मिश्रा, ओड़िशा से सीता कुमारी समेत अन्य पधारे हैं. सत्संग, पूजा-अर्चना, मानस पाठ कीर्तन आदि कार्यक्रम चल रहे हैं. इस सत्संग में सैकड़ों श्रद्धालु भक्त शामिल हो सत्संग का आनंद उठा रहे हैं.

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