ट्रंप की नई चाल: ईरान की घेराबंदी और आपसी फूट से सरेंडर का प्लान, स्पीकर बोले- नाकाम होंगे मंसूबे

Published by :Govind Jee
Published at :30 Apr 2026 7:36 AM (IST)
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Trump iran naval blockade surrender plan ghalibaf

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ.

Trump Iran Naval Blockade: ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने एक ऑडियो मैसेज के जरिए देश को आगाह किया है. न्यूज एजेंसी ISNA की बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक, गालिबाफ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को झुकाने के लिए 'नेवल ब्लॉकेड' (समुद्री घेराबंदी) और देश के अंदर आपसी झगड़े पैदा करने की साजिश रच रहे हैं.

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Trump Iran Naval Blockade: उन्होंने भरोसा जताया कि ईरान दुश्मनों के इस धोखेबाज प्लान को फेल कर देगा. ISNA के अनुसार, गालिबाफ ने पिछले दो महीनों से ईरानी जनता के जज्बे की तारीफ की. उन्होंने कहा कि दुश्मन अब हमले के नए फेज में पहुंच गया है. वे ईरान पर आर्थिक दबाव डालने और आपसी विवाद पैदा करने के लिए समुद्री रास्तों को रोकने और मीडिया के जरिए गलत खबरें फैलाने का सहारा ले रहे हैं. उनका मकसद देश को अंदर से कमजोर करना या पूरी तरह खत्म करना है.

ट्रंप की रणनीति: ‘उदारवादी बनाम कट्टरपंथी’  

स्पीकर ने बताया कि ट्रंप खुलेआम ईरान को दो गुटों कट्टरपंथियों और उदारवादियों में बांटने की बात करते हैं. इसके तुरंत बाद वे नेवल ब्लॉकेड की धमकी देते हैं और कहते हैं कि यह तब तक चलेगा जब तक ईरान उनके साथ समझौता नहीं कर लेता. गालिबाफ के मुताबिक, यह साफ है कि ट्रंप आर्थिक दबाव और आपसी फूट के जरिए ईरान से सरेंडर करवाना चाहते हैं.

तख्तापलट की साजिशें हुईं नाकाम

गालिबाफ ने दावा किया कि दुश्मनों ने ईरानी त्योहार ‘चहारशंबे सूरी’ के दौरान तख्तापलट (Coup) करने की बड़ी प्लानिंग की थी. महीनों की तैयारी और सुरक्षा ठिकानों पर हमलों के बावजूद, ईरान के लोगों ने एकजुट होकर इसे नाकाम कर दिया. इसके अलावा, इस्फहान में जमीनी हमले की कोशिश भी की गई थी, लेकिन वहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने इसकी तुलना ‘तबास’ की घटना से करते हुए इसे दुश्मन के लिए एक बड़ा स्कैंडल बताया.

मिसाइल और ड्रोन की ताकत ने रोका दुश्मन का रास्ता

ऑडियो मैसेज में कहा गया कि युद्ध के शुरुआती दिनों से ही दुश्मन ने देश के सिस्टम को खत्म करने के लिए बड़े नेताओं और सैन्य कमांडरों की हत्या की साजिश रची, जो फेल रही. इसके बाद उन्होंने ईरान की हमला करने की ताकत (Offensive System) को बर्बाद करने की कोशिश की ताकि ईरान मुकाबला न कर सके. लेकिन जब उन्होंने देखा कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम और भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तो उन्हें समझ आ गया कि वे अपने मकसद में कभी कामयाब नहीं होंगे.

ईरान को वेनेजुएला बनाने की कोशिश भी रही असफल

ISNA के मुताबिक, गालिबाफ ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान में वही हालात पैदा करना चाहता था जो वेनेजुएला में हुए थे, लेकिन ईरानी सेना ने इसे मुमकिन नहीं होने दिया. देश के पश्चिमी हिस्से में अलगाववादियों को भड़काने की कोशिशें भी सेना और इंटेलिजेंस की सतर्कता से नाकाम हो गईं. उन्होंने लोगों से एकता बनाए रखने की अपील की और कहा कि ईरान इस ‘धोखेबाज प्लान’ को हराकर बड़ी जीत हासिल करेगा.

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तनाव की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी

पश्चिम एशिया में इस बड़े तनाव की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी. उस दिन अमेरिका और इजरायल के ज्वाइंट सैन्य हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और कई खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. इस टकराव की वजह से समुद्री रास्तों में रुकावट आई है, जिससे इंटरनेशनल एनर्जी मार्केट और ग्लोबल इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ा है.

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लेखक के बारे में

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गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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