सोनारपुर या रूपा-पुर? दक्षिण सोनारपुर फतह करने निकलीं ‘द्रौपदी’, जानें क्यों छप्पन भोग छोड़ मांगती हैं सिर्फ ‘अंडे की झोल’

Published by :Mithilesh Jha
Published at :30 Apr 2026 7:01 AM (IST)
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Roopa Ganguly Sonarpur Election

Roopa Ganguly Sonarpur Election: दक्षिण सोनारपुर से बीजेपी उम्मीदवार रूपा गांगुली की एक्सक्लूसिव कहानी. उनके माता-पिता का सोनारपुर कनेक्शन और उनकी अनोखी फूड हैबिट्स. अभिनेत्री बनाम अभिनेत्री की जंग में रूपा का पलड़ा कितना भारी.

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Roopa Ganguly Sonarpur Election: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ग्लैमर और जुझारूपन का जब संगम होता है, तो चेहरा उभरता है, रूपा गांगुली का. 11 वर्षों से राजनीति में सक्रिय और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रूपा गांगुली अब एक नयी अग्निपरीक्षा से गुजर रही हैं.

राज्यसभा के बाद विधानसभा की जंग में रूपा गांगुली

राज्यसभा की सांसद (राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत) के रूप में दिल्ली की राजनीति का अनुभव लेने के बाद, वह अब दक्षिण सोनारपुर की जमीन पर विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि उनके खिलाफ चुनावी मैदान में तृणमूल की जो प्रत्याशी हैं, वह भी अभिनेत्री हैं. लेकिन रूपा के समर्थक डंके की चोट पर कह रहे हैं- क्या उनकी तुलना हमारी नेशनल स्टार (द्रौपदी) से हो सकती है?

सोनारपुर से है रूपा का गहरा नाता

रूपा गांगुली का सोनारपुर से रिश्ता केवल वोट का नहीं, बल्कि भावनाओं का है. रूपा की जड़ें पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) में हैं. उनके जन्म और पढ़ाई के बाद जब उनके माता-पिता ने स्थायी रूप से भारत आने का फैसला किया, तो रूपा ने उनके लिए सोनारपुर में ही आशियाना बनाया था.

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उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उस घर से रूपा का लगाव आज भी अटूट है. टिकट मिलने के बाद से वह इसी घर को अपना चुनावी मुख्यालय बनाकर रह रही हैं.

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Roopa Ganguly Sonarpur Election: कैलाश विजयवर्गीय का दौर और राष्ट्रीय पहचान

रूपा गांगुली का राजनीतिक उत्थान बंगाल बीजेपी के पूर्व पर्यवेक्षक कैलाश विजयवर्गीय के समय में तेजी से हुआ. वह उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिन्हें राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था. इसके बाद बीजेपी में कई बदलाव आये, कई नेता आये और गये, लेकिन रूपा गांगुली की प्रासंगिकता और उनका रुतबा आज भी बरकरार है. वह आज भी बीजेपी के लिए बंगाल में एक बड़ा चेहरा हैं.

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अनोखी बात : स्टार जैसी चमक, फरमाइश सिर्फ ‘अंडा-भात’

रूपा गांगुली एक बड़ी सेलिब्रिटी हैं. जब वह कार्यकर्ताओं के घर जाती हैं, तो लोग उनके स्वागत में छप्पन भोग सजाना चाहते हैं. लेकिन रूपा का अंदाज बिल्कुल अलग है.

  • सादा जीवन : द्रौपदी के रूप में घर-घर में मशहूर हो चुकीं रूपा जहां भी जाती हैं, पहले ही अपना मेनू बता देती हैं. उन्हें भारी-भरकम खाना पसंद नहीं है.
  • पसंदीदा डिश : उनकी थाली में अगर ‘खिचड़ी जैसा गला हुआ भात’ और ‘अंडे की पतली झोल’ (Egg Curry) मिल जाये, तो वह सबसे ज्यादा खुश होती हैं. वह इस साधारण भोजन को परम तृप्ति के साथ खाती हैं.
  • स्पष्ट मिजाज : अगर उन्हें यह सादा खाना नहीं मिलता, तो वह अपनी नाखुशी जाहिर करने में भी कतराती नहीं हैं.

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बेबाकी के लिए जानी जाती हैं रूपा गांगुली

सियासत के गलियारों में रूपा गांगुली अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं. अब देखना यह है कि क्या सोनारपुर की जनता उनकी इस सादगी और राष्ट्रीय ख्याति पर मुहर लगाकर सोनारपुर को ‘रूपा-पुर’ बनाती है या नहीं.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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