स्कूल प्रबंधनों ने बढ़ा दी फीस
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अभिभावक एसोसिएशन का गठन नहीं समस्तीपुर : स्कूल अभिभावकों की जेबों पर किस तरह से डाका डालते हैं, इसकी जरा बानगी देखिये. कैपिटेशन, री-एडमिशन तो एक तरफ स्कूल विभिन्न मदों में अभिभावकों को लूट रहे है़. पिछले तीन वर्षो में स्कूलों 20 फीसदी फीस बढ़ा दी है, जबकि स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले स्कूल […]
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अभिभावक एसोसिएशन का गठन नहीं
समस्तीपुर : स्कूल अभिभावकों की जेबों पर किस तरह से डाका डालते हैं, इसकी जरा बानगी देखिये. कैपिटेशन, री-एडमिशन तो एक तरफ स्कूल विभिन्न मदों में अभिभावकों को लूट रहे है़. पिछले तीन वर्षो में स्कूलों 20 फीसदी फीस बढ़ा दी है, जबकि स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले स्कूल में गठित अभिभावक एसोसिएशन से सहमति लेनी होती है़
लेकिन यहां तो स्कूलों में अभिभावक एसोसिएशन का गठन ही नहीं हुआ है तो मंजूरी देगा कौऩ सीबीएसइ नियमों के तहत स्कूल प्रबंधक अभिभावकों द्वारा चुनी गयी अभिभावक एसोसिएशन की सहमति-मंजूरी से ही फीस वृद्घि कर सकते है़ अभिभावक एसोसिएशन का गठन कानूनन जरूरी है़ किसी भी स्कूल में वैधानिक रूप से चुनी हुई अभिभावक एसोसिएशन नहीं है़
स्कूल प्रबंधक अपने स्कूल में अभिभावक एसोसिएशन बनने ही नहीं देते है़ इसकी जगह अपने ही 2-3 समर्थक अभिभावकों को अपनी मैनेजिंग कमेटी में शामिल कर लेते हैं और फीस वृद्घि कर उनकी सहमति से हस्ताक्षर करा लेते है़ सभी स्कूल राज्य सरकार द्वारा तय किये गये मदों-फंडों के अंतर्गत ही फीस ले सकते है़
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किये गये फंड सिर्फ सात है़ इसमें टय़ूशन फीस, दाखिला शुल्क (नये बच्चों से), खेल शुल्क, साइंस फीस, मैगजीन फीस, परीक्षा शुल्क, पीटीए शामिल है़ जबकि स्कूल प्रबंधकों ने अपनी मर्जी से दर्जनों गैर-कानूनी फंड जैसे बिल्डिंग फंड, मिसलेनियस, परीक्षा, मेंटेनेंस, एक्टिविटी, हाउस कीपिंग, कम्प्यूटर, टूर, विकास शुल्क, मैगजीन, स्मार्ट क्लास, इंश्योरेंस मेडिकल और अन्य करिकुलम गतिविधियां आदि कई नामों से बना रखे हैं, जिनके तहत वे छात्रों से पैसा ले रहे है़
कोई भी स्कूल किसी भी प्रकार का डोनेशन, कैपिटेशन फीस, विकास शुल्क, बिल्डिंग फंड नहीं ले सकता और किसी भी हालत में शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं कर सकता़
ऐसे मिलती है सीबीएसइ स्कूलों को मान्यता
स्कूलों को सीबीएसइ की मान्यता तभी मिलती है, जब स्कूलों द्वारा यह शपथ पत्र दिया जाता है कि अध्यापकों को वेतन देने-बढ़ाने व भवन बनाने तथा स्कूल में सुविधाएं विकसित करने के लिए उनके पास पर्याप्त धन है और स्कूल का पैसा स्कूल में ही लगेगा, बाहरी कार्यो में नहीं
बोले अधिकारी
‘शिक्षा एक मिशन है, व्यवसाय नहीं. सीबीएसइ के जो निजी स्कूल शिक्षा का व्यवसायीकरण कर आर्थिक शोषण कर रहे हैं, उनके खिलाफ सीबीएसइ नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जायेगी़ कोई भी अभिभावक को कैपिटेशन या री-एडमिशन से संबंधित शिकायत कर सकता है, सीबीएसइ कार्रवाई करेगा़’
रश्मि त्रिपाठी, रीजनल आफिसर सीबीएसइ (बिहार-झारखंड)
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