बिहार के 50 हजार रिटायर्ड शिक्षक-कर्मचारियों की पेंशन अटकी, जानिए वित्त विभाग ने क्यों लगाई रोक

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 23 Feb 2026 8:12 PM

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सांकेतिक तस्वीर

Bihar Teacher News: बिहार के विश्वविद्यालयों द्वारा उपयोगिता प्रमाण-पत्र जमा नहीं करने के कारण पेंशन भुगतान पर संकट गहरा गया है. वित्त विभाग ने करीब 50 हजार रिटायर्ड शिक्षक और कर्मचारियों की जनवरी माह की पेंशन पर रोक लगा दी है.

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Bihar Teacher News: बिहार के विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा अब सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है. क्योंकि, उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) जमा नहीं होने के कारण वित्त विभाग ने पेंशन भुगतान पर रोक लगा दी है. जिससे करीब 50 हजार पेंशनधारकों की जनवरी माह की राशि अटक गई है.

उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं, तो पेंशन नहीं

वित्त विभाग ने करीब 18 माह पहले जारी राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र पारंपरिक विश्वविद्यालयों से मांगा था, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दी गई धनराशि नियमानुसार खर्च की गई है. इसके लिए कई बार लिखित निर्देश और स्मरण पत्र भेजे गए.

कुछ विश्वविद्यालयों ने प्रमाण-पत्र भेजा भी, लेकिन वह अधूरा या त्रुटिपूर्ण पाया गया. इसी कारण प्रस्ताव लंबित रह गया और पेंशन की स्वीकृति नहीं मिल सकी.

50 हजार पेंशनधारक प्रभावित

उच्च शिक्षा विभाग ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन से जुड़ा प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा था. परंतु उपयोगिता प्रमाण-पत्र के अभाव में फाइल आगे नहीं बढ़ सकी. नतीजा यह हुआ कि राज्यभर के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों के करीब 50 हजार सेवानिवृत्त शिक्षक-कर्मचारियों को जनवरी से पेंशन नहीं मिल पाई है.

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जिन विश्वविद्यालयों से सही और पूर्ण उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्राप्त होंगे, उन्हीं के पेंशनधारकों को राशि जारी की जाएगी. इसको लेकर विश्वविद्यालयों को रोज मैसेज और अनुस्मारक भेजे जा रहे हैं.

किन-किन विश्वविद्यालयों पर असर

राज्य के जिन विश्वविद्यालयों पर यह संकट गहराया है. उनमें पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, बी. आर. ए. बिहार विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय और मौलाना मजहरुल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय शामिल हैं.

समाधान की राह क्या?

अब सबकी नजर विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिकी है. जैसे ही पूर्ण और सही उपयोगिता प्रमाण-पत्र वित्त विभाग को मिलेगा. पेंशन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. तब तक हजारों सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को इंतजार करना होगा.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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