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पटना : सीबीएसइ स्कूलों में बच्चों के गुस्सा करने पर लगेगी रोक

Updated at : 28 Dec 2019 9:14 AM (IST)
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पटना : सीबीएसइ स्कूलों में बच्चों के गुस्सा करने पर लगेगी रोक

पटना : बच्चे अब स्कूल में गुस्सा न करें, इसकी ट्रेनिंग दी जायेगी. शिक्षकों को भी इसका ध्यान रखना पड़ेगा कि वह गुस्सा न करें. बच्चों में सकारात्मकता लाने के लिए सीबीएसइ ने अपने स्कूलों को निर्देश जारी किया है. स्कूलों को एंगर फ्री जोन बनाने को कहा है. सीबीएसइ के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने […]

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पटना : बच्चे अब स्कूल में गुस्सा न करें, इसकी ट्रेनिंग दी जायेगी. शिक्षकों को भी इसका ध्यान रखना पड़ेगा कि वह गुस्सा न करें. बच्चों में सकारात्मकता लाने के लिए सीबीएसइ ने अपने स्कूलों को निर्देश जारी किया है. स्कूलों को एंगर फ्री जोन बनाने को कहा है. सीबीएसइ के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने सभी स्कूलों के प्रिसिंपल को पत्र जारी कर स्कूलों में नो एंगर जोन या एंगर फ्री जोन बनाने की दिशा में तुरंत काम शुरू करने का निर्देश दिया है.
त्रिपाठी ने कहा है कि इसके लिए लीडर्स तैयार करें. लीडर्स की ही इसकी जिम्मेदारी सौंपे, ताकि स्कूलों को एंगर फ्री जोन बनाने पर काम करें. बोर्ड ने पत्र में कहा है कि बच्चों को ‘क्रोध से मुक्ति’ का मूल्य सिखाने का सबसे अच्छा तरीका खुद उदाहरण स्थापित करना है. स्कूलों से कहा गया है कि बच्चों से हंस कर बात करें. बच्चे व आसपास के सभी लोगों से सौम्य तरीके से बात करें. हमेशा सेल फोन की ओर न देखें, ब्रीदिंग एक्सरसाइज सभी लोगों को कराएं, 20 मिनट वे हर दिन खुद को दें. इसके अलावा अन्य तरीके भी अपनाये जा सकते हैं. सीबीएसई ने कहा है कि इस प्रयास से बच्चे डर, अनादर, दुखी होने से दूर रहेंगे और वे मानसिक रूप से और सक्रिय हो सकेंगे. केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘फिट इंडिया’ कार्यक्रम शुरू किया है. इसी का अनुसार सचिव ने कहा है कि फिटनेस दिमाग को साफ करता है. रचनात्मक ऊर्जा पैदा करता है.
गुस्सा फिटनेस के लिए हानिकारक है. अनियंत्रित क्रोध के कारण चिंता, उच्च रक्तचाप और सिरदर्द जैसी बीमारियां होती हैं. इस कारण गुस्सा नहीं किया जाये. बोर्ड ने ‘जॉयफुल एजुकेशन एंड होलिस्टिक फिटनेस’ पर जोर दिया है और कहा है कि एंगर फ्री जोन बनाने से सभी लोग अपने गुस्से को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे, चाहे वह शिक्षक हों, अभिभावक, स्कूल कर्मचारी या अन्य लोग हों. पत्र में कहा गया है कि बच्चों की पहली पाठशाला स्कूल है. स्कूल ही नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने में कारगार साबित होता है. बच्चों का समग्र विकास स्कूल से ही होता है. इसलिए स्कूलों में बच्चों को गुस्सा नहीं करने के तौर-तरीके बताया जायेगा. बच्चे निगेटिव बातों पर ध्यान नहीं दे. स्कूल में सभी बातों को बता कर सकारात्मकता की दिशा में उसे ले जाने का प्रयास स्कूल करेंगे.
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