बिहार की तीन पारंपरिक कलाओं को मिला GI टैग, दुनिया में बढ़ेगा बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया पेंटिंग का मान

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 14 Jun 2026 1:45 PM

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AI से बनाई गई तस्वीर

Bihar GI Tag Product: बिहार की सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत को बड़ी पहचान मिली है. राज्य के तीन पारंपरिक उत्पाद- नालंदा की बावन बूटी साड़ी, गया की पत्थरकट्टी कला और भोजपुर की पीढ़िया पेंटिंग को GI टैग प्रदान किया गया है.

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Bihar GI Tag Product: बिहार की समृद्ध कला और हस्तशिल्प परंपरा को एक बड़ी पहचान मिली है. राज्य के तीन पारंपरिक उत्पादों को भारत सरकार की ओर से भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है. इससे बिहार की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी.

GI टैग पाने वाले उत्पादों में नालंदा की प्रसिद्ध बावन बूटी साड़ी-फैब्रिक, गया का पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पारंपरिक पीढ़िया पेंटिंग शामिल हैं. इन कलाओं की अपनी अलग पहचान है और ये वर्षों से बिहार की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा रही हैं.

नाबार्ड और बिहार सरकार के प्रयास रंग लाए

इस उपलब्धि के पीछे नाबार्ड और बिहार सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. दोनों संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से इन पारंपरिक उत्पादों का दस्तावेजीकरण और पंजीकरण कार्य पूरा किया गया. GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष पहचान और कानूनी संरक्षण मिलेगा.

पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का रहा अहम योगदान

नाबार्ड के अनुसार, GI पंजीकरण की प्रक्रिया को सफल बनाने में वाराणसी के ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव और पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का विशेष योगदान रहा. उन्होंने तकनीकी मार्गदर्शन दिया और आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसी वजह से बिहार के इन तीनों उत्पादों को GI सूची में शामिल किया जा सका.

स्थानीय कलाकारों और बुनकरों को होगा फायदा

GI टैग मिलने से सबसे बड़ा लाभ स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और कलाकारों को होगा. अब उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार में अलग पहचान मिलेगी. इससे उनकी आय बढ़ने की संभावना है और पारंपरिक कला से जुड़े लोगों को नए अवसर मिलेंगे.

नकली उत्पादों पर लगेगी रोक

GI टैग का एक बड़ा फायदा यह भी है कि अब इन उत्पादों के नाम पर नकली सामान बेचना आसान नहीं होगा. नालंदा की बावन बूटी, गया की पत्थरकट्टी कला और भोजपुर की पीढ़िया पेंटिंग की प्रामाणिकता सुरक्षित रहेगी. इससे असली उत्पादों की मांग बढ़ेगी और कारीगरों को उचित मूल्य मिलेगा.

पर्यटन और हस्तशिल्प उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से बिहार के पर्यटन और हस्तशिल्प उद्योग को नई गति मिलेगी. साथ ही युवाओं का रुझान भी पारंपरिक कला और शिल्प की ओर बढ़ेगा. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बिहार की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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