पुणे हादसा : बोले मृत मजदूरों के परिजन, गांव में मिलता काम, तो नहीं छिनती खुशी

कितने मजदूर बाहर काम कर रहे विभाग को नहीं पता पटना : बिहार के बाहर रोजगार के तलाश में मजदूरों का पलायन लगातार हो रहा है. बिहार सरकार के पास निर्माण काम के निबंधित मजदूरों की संख्या लगभग 11 लाख है. इसमें कितने मजदूर बिहार में व कितने मजदूर बिहार के बाहर काम कर रहे […]
कितने मजदूर बाहर काम कर रहे विभाग को नहीं पता
पटना : बिहार के बाहर रोजगार के तलाश में मजदूरों का पलायन लगातार हो रहा है. बिहार सरकार के पास निर्माण काम के निबंधित मजदूरों की संख्या लगभग 11 लाख है. इसमें कितने मजदूर बिहार में व कितने मजदूर बिहार के बाहर काम कर रहे हैं, विभाग को इसकी जानकारी नहीं है. बिहार से बाहर काम करनेवाले की संख्या करीब 40 से 50 लाख है.
इसमें शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूर हैं. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन अधिक है. जानकारों के अनुसार 58% परिवारों में कम से कम एक प्रवासी मजदूर है. यह मजदूर कम अवधि के लिए प्रवास पर जाकर दिहाड़ी मजदूर मजदूर अनियमित रोजगार में काम तलाशते हैं. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मुंबई सहित अन्य बड़े शहरों में इनकी संख्या अधिक है.
कई तरह का करते हैं सामना: प्रवासी मजदूरों को रोजगार की तलाश में बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. कभी काम के दौरान हादसा होने पर उन्हें सुविधा नहीं मिलती है. कभी किसी कारण से दूसरे मजदूरों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. पिछले साल गुजरात में एक मामले को बड़ी संख्या में काम छोड़ कर वापस आना पड़ा था.
पलायन लील रही लोगों की जिंदगी: केंद्र व राज्य सरकार मजदूरों के पलायन की रोकथाम को लेकर बड़े-बड़े दावे करती रही है. तरह तरह की योजनाओं के संचालन की बात भी करती रही है. योजनाएं सरकारी अभिलेखों में चलती भी है.
पर उसका लाभ यहां के मजदूरों को नहीं मिलती है. बलरामपुर का यह हादसा सरकार की योजनाओं के दावों की पोल खुलती है. दो वर्ष पहले भी आजमनगर प्रखंड के कई मजदूर की मौत बाहर में हो गयी थी. मजदूरों का पलायन ही उनकी जिंदगी को लील रही है. पुणे का यह हादसा इसी बात की ओर संकेत करता है.
हालांकि यह भी विडंबना ही है कि स्थानीय श्रम संसाधन विभाग के पास ऐसा कोई डाटा नहीं है कि जिले से कितने मजदूर का पलायन हुआ है. पुणे हादसे में असमय काल के गाल में समा चुके भीमा दास के पिता श्याम लाल दास रोते हुए कहते हैं कि कोई शौक से अपने बेटे व परिवार को दूसरे शहर में काम करने के लिए नहीं भेजते है. यहां काम का अभाव है. इतना बड़ा परिवार को चलाना है. इसलिए मजबूरी में बेटे व परिवार के अन्य सदस्य को काम करने के लिए बाहर जाना पड़ा. पर उन्हें क्या पता था कि उनका बेटा सदा के लिए बाहर ही रह जायेगा.
प्रवासी मजदूरों के लिए है योजना
राज्य के बाहर काम करने वाले मजदूरों के लिए बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना है. योजना में प्रवासी मजदूर को काम करने के दौरान मृत्यु हो जाने की स्थिति में मजदूर के आश्रितों को एक लाख रुपये, स्थाई अपंगता में 75 हजार रुपये व अस्थाई अपंगता के लिए 37,500 रुपये आरटीजीएस से मिलता है.
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