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आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को मिलना चाहिए आरक्षण : अठावले

Updated at : 25 Oct 2018 10:23 PM (IST)
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आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को मिलना चाहिए आरक्षण : अठावले

पटना : केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने उच्च जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण दिये जाने की मांग करते हुए गुरुवार को कहा कि इस आशय का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राजग की बैठक के दौरान रखा गया है तथा संसद में भी इस मुद्दे को […]

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पटना : केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने उच्च जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण दिये जाने की मांग करते हुए गुरुवार को कहा कि इस आशय का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राजग की बैठक के दौरान रखा गया है तथा संसद में भी इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है.

बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 131वीं जयंती के अवसर पर गुरुवार को एसके मेमोरियल हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अठावले ने कहा कि उच्च जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए. इस आशय का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राजग की बैठक के दौरान रखा है गया तथा संसद में भी इस मुद्दे को उठाते रहे हैं.

उन्होंने मंच पर मौजूद केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में मराठा, गुजरात में पटेल और हरियाणा के जाट समुदाय भी आरक्षण की मांग कर रहे हैं. उसके लिए एक विकल्प यह है कि उच्चतम न्यायालय के 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का प्रावधान नहीं किये जाने को ध्यान में रखते हुए और दलित, आदिवासी और ओबीसी के लिए आरक्षण के 50 प्रतिशत के प्रावधान के साथ छेड़छाड़ किये बिना बाकी बचे 50 प्रतिशत में से 25 प्रतिशत उच्च जाति में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए आरक्षित किये जाने के लिए संसद में कानून बनाया जाये.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अठावले की मांग पर हालांकि अपने संबोधन में कोई आश्वासन नहीं दिया. रविशंकर ने कांग्रेस द्वारा हाल में मनायी गयी श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू) की जयंती की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनके जैसे महान व्यक्ति की जयंती को राजनीति का अवसर नहीं बनाया जाना चाहिए जो कि कुछ दिन पहले पटना में दिखायी पड़ा.

उन्होंने महागठबंधन में शामिल कांग्रेस और प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी राजद की ओर इशारा करते हुए कहा कि श्रीबाबू ने बिहार को सुशासन के मामले में ऊंचाई पर पहुंचाया था, लेकिन आज जो लोग उनकी जयंती मना रहे हैं, वे इस प्रदेश को बर्बाद करने वाले दल के साथ क्यों खड़े हो गये. इसका जवाब उन्हें देना होगा.

केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि देश में जो सुशासन की बात कही जाती है, वह श्रीबाबू के मुख्यमंत्रित्व काल के लिए सबसे पहले इस्तेमाल किया गया था. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि श्री कृष्ण बाबू की कांग्रेस के दौर में बिहार में उद्योग-धंधे स्थापित हुए और विकास हुआ जबकि लालू कांग्रेस के दौरान एक-एक कर सभी बंद हुए. आज की कांग्रेस को तो श्री कृष्ण बाबू का नाम लेने का भी नैतिक अधिकार नहीं है. 15 साल के जंगल राज के दौरान बिहार की बर्बादी के लिए राजद के साथ कांग्रेस भी जिम्मेवार है. कार्यक्रम को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, बिहार के भाजपा से कई मंत्री और सांसदों और विधायकों ने भी संबोधित किया.

बिहार में एससी-एसटी कानून के तहत दर्ज मामलों की बढ़ी हुई संख्या चिंताजनक: अठावले
पटना : केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने बिहार में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की बढ़ी हुई संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उम्मीद जतायी है कि राज्य सरकार दलितों की सुरक्षा एवं विकास के लिए और बेहतर काम करेगी. अनुसूचित जाति और दिव्यांगों की राज्य में नियुक्तियों की स्थिति और सामाजिक न्याय मंत्रालय की योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर पटना में बृहस्पतिवार को बिहार सरकार के आला अधिकारियों के साथ एक बैठक की.

बैठक के बाद अठावले ने संवाददाताओं से कि बिहार में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम के तहत वर्ष 2014 में 6560 मामले, 2015 में 6372 मामले, 2016 में 5730, 2017 में 6826 और 2018 में अब तक 4517 मामले दर्ज हुए हैं. केंद्रीय मंत्री ने पीड़ितों की संख्या को ज्यादा बताया और इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया. बैठक में भी उन्होंने इस मामले में चिंता व्यक्त करते हुए उम्मीद जतायी कि राज्य सरकार दलितों की सुरक्षा एवं विकास के लिए और बेहतर काम करेगी. केंद्रीय मंत्री ने बैठक के दौरान एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति, वृद्धों और दिव्यांगजनों की पेंशन, अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को सरकारी मदद एवं नौकरियों में आरक्षण जैसे विषयों पर अधिकारियों से अद्यतन जानकारी ली और चर्चा की.

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