कौन बनेगा बीजेपी का एमएलसी उम्मीदवार, अंतिम दौर में पहुंची चयन प्रक्रिया, रेस में ये नाम आगे
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 01 Jun 2026 7:40 PM
सम्राट चौधरी की फाइल फोटो
Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर बीजेपी में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है. पार्टी के भीतर कई दावेदारों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा अब काफी हद तक सिमट गई है. सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधते हुए बीजेपी जल्द अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर सकती है.
Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए बीजेपी के भीतर कई नेताओं के बीच एमएलसी बनने की होड़ थी, लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती नजर आ रही है. पार्टी नेतृत्व ने कई दावेदारों को प्रदेश संगठन में जिम्मेदारी देकर उम्मीदवारों की संख्या सीमित करने की कोशिश की है.
बीजेपी इस बार सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए एक सवर्ण, एक पिछड़ा और एक अतिपिछड़ा वर्ग से उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही है. प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की नई टीम बनने के बाद कई दावेदारों की दावेदारी खुद कमजोर हो गई है.
सवर्ण वर्ग में सबसे ज्यादा मुकाबला
एमएलसी की दौड़ में सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा सवर्ण नेताओं के बीच देखी जा रही है. खास तौर पर राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ समाज से जुड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं. राजपूत वर्ग से राजेंद्र सिंह और लाजवंती झा के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. वहीं ब्रजेश रमन, अमृता भूषण और धीरेन्द्र सिंह भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं.
कायस्थ समाज से संजय मयूख का नाम सबसे आगे माना जा रहा है. हालांकि पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि उन्हें भविष्य में बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया जा सकता है. ऐसे में एमएलसी की सूची से उनका नाम बाहर भी रह सकता है. राजेश वर्मा को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी दावेदारी भी कमजोर मानी जा रही है.
ब्राह्मण समाज से लाजवंती झा का नाम चर्चा में
ब्राह्मण समाज से लाजवंती झा को मजबूत दावेदार माना जा रहा है. हालांकि पार्टी द्वारा संतोष पाठक और राजेश झा को प्रदेश महामंत्री तथा सीमा झा और प्रभाकर मिश्र को प्रदेश मंत्री बनाए जाने के बाद ब्राह्मण वर्ग की दावेदारी कुछ कमजोर होती दिखाई दे रही है.
पिछड़ा वर्ग से पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है. लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने और पार्टी के प्रति समर्पण के कारण उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है. सरोज रंजन पटेल को प्रदेश महासचिव बनाए जाने के बाद प्रेम रंजन पटेल की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं. वहीं ललन मंडल को संगठन में जगह मिलने के बाद उनकी एमएलसी की दावेदारी लगभग खत्म मानी जा रही है.
इसके अलावा बलराम मंडल और शीला कुशवाहा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके नाम भी एमएलसी की संभावित सूची से बाहर माने जा रहे हैं. यादव समाज से प्रवीण यादव को संगठन में जिम्मेदारी मिलने के बाद इस वर्ग की दावेदारी भी कमजोर पड़ गई है.
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अतिपिछड़ा वर्ग से सकलदेव बिंद का नाम सबसे आगे
अतिपिछड़ा वर्ग में सकलदेव बिंद का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. पार्टी के भीतर उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है. सकलदेव बिंद वही नेता हैं जिन्होंने तारापुर विधानसभा चुनाव के दौरान अपना नामांकन वापस लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए राजनीतिक राह आसान की थी.
पार्टी में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें एमएलसी उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है. अब सभी की नजर बीजेपी नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है. आने वाले दिनों में पार्टी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है, जिसके बाद विधान परिषद चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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