बिहार विधान परिषद चुनाव में किसका पलड़ा भारी, जानिए सीटों का पूरा गणित
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 01 Jun 2026 3:11 PM
नीतीश कुमार और सीएम सम्राट चौधरी
Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है. इनमें 9 सीटों पर नियमित चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव होगा. विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए और महागठबंधन की संभावनाएं साफ दिख रही हैं. दूसरी वरीयता के वोट समीकरण बदल सकते हैं.
Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए 18 जून को मतदान होगा. इनमें 9 सीटों पर छह साल के कार्यकाल के लिए नियमित चुनाव होना है, जबकि एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा. यह उपचुनाव पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार के विधान परिषद छोड़ने से खाली हुई सीट के लिए हो रहा है. इस सीट का कार्यकाल अभी करीब चार साल बचा हुआ है. विधान परिषद की ये सभी सीटें विधानसभा कोटे की हैं. यानी इन सीटों पर सीधे जनता नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा के विधायक मतदान करते हैं. 1 जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
किन सीटों पर हो रहा है चुनाव
नियमित चुनाव वाली 9 सीटों में जदयू के श्रीभगवान सिंह कुशवाहा, गुलाम गौस, भीष्म सहनी और कुमुद वर्मा की सीट शामिल हैं. भाजपा के सम्राट चौधरी और संजय मयूख का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है. राजद के सुनील कुमार सिंह और मोहम्मद फारूक तथा कांग्रेस के समीर कुमार सिंह की सीटों पर भी चुनाव होना है.
कैसे तय होती है जीत
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 9 विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव होना है. ऐसे में जीत का आंकड़ा कुल मतदान करने वाले विधायकों की संख्या के आधार पर तय किया जाता है. अगर सभी 243 विधायक वोट डालते हैं, तो चुनावी नियमों के अनुसार जीत का कोटा निकाला जाता है. इसके लिए कुल वोट मूल्य 24300 माना जाता है, क्योंकि हर विधायक के वोट की कीमत 100 होती है.
इसके बाद 24300 को 10 से भाग दिया जाता है, क्योंकि 9 सीटों के साथ एक संख्या और जोड़ी जाती है. इससे आंकड़ा 2430 आता है. इसमें 1 जोड़ने पर जीत का कोटा 2431 हो जाता है. यानी किसी भी उम्मीदवार को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 2431 वोट मूल्य हासिल करना होगा. आसान भाषा में कहें तो लगभग 25 विधायकों की पहली वरीयता का समर्थन किसी उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त माना जाता है.
एनडीए और महागठबंधन की स्थिति
वर्तमान समय में विधानसभा में एनडीए के पास जदयू, भाजपा, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो को मिलाकर 202 विधायक हैं. इस संख्या के आधार पर एनडीए आसानी से 8 सीटें जीत सकता है. दूसरी तरफ महागठबंधन के पास राजद, कांग्रेस, माले, सीपीएम और अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर 35 से ज्यादा विधायक हैं. इसके अलावा एआईएमआईएम और बसपा के विधायक भी विपक्षी खेमे में हैं. कुल मिलाकर विपक्ष के पास लगभग 41 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त हैं.
दूसरी वरीयता के वोट क्यों अहम
यदि पहली वरीयता के वोटों से सभी सीटों का फैसला नहीं हो पाता, तो दूसरी वरीयता के मतों की गिनती शुरू होती है. इसी प्रक्रिया से पहले भी राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम को जीत मिली थी. उस चुनाव में कई उम्मीदवार पहले दौर में ही जीत गए थे. उनके अतिरिक्त वोटों की वैल्यू निकालकर दूसरी वरीयता के आधार पर दूसरे उम्मीदवार को ट्रांसफर किया गया. इसी वजह से शिवेश राम जीत का आंकड़ा पार कर सके थे.
क्या बदल सकता है समीकरण
फिलहाल विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए के पास 8 सीटें जीतने का स्पष्ट गणित है. वहीं महागठबंधन एक सीट जीत सकता है. एनडीए के पास 8 सीट जीतने के बाद केवल दो अतिरिक्त वोट बचेंगे, जबकि विपक्ष के पास करीब 16 वोट बचेंगे. इन अतिरिक्त वोटों के आधार पर कोई भी पक्ष अतिरिक्त सीट नहीं निकाल सकता. यदि किसी दल ने रणनीतिक तौर पर 10वां उम्मीदवार उतार दिया या कहीं क्रॉस वोटिंग हुई, तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है.
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क्या है संभावित नतीजा
मौजूदा राजनीतिक और संख्यात्मक स्थिति को देखें तो विधानसभा का गणित साफ संकेत दे रहा है कि 9 नियमित सीटों में से 8 सीटें एनडीए और 1 सीट महागठबंधन के खाते में जा सकती है. हालांकि अंतिम तस्वीर मतदान और वरीयता मतों की गिनती के बाद ही साफ होगी.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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