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केंद्र कर सकता है बिहार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित

Updated at : 22 Jul 2018 4:37 AM (IST)
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केंद्र कर सकता है बिहार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित

पटना : पूरा राज्य सूखे के चपेट में है. जुलाई में औसत से 54% कम बारिश हुई है. बारिश न होने से सबसे अधिक प्रभाव धान की रोपनी पर पड़ा है. एक मोटे अनुमान के अनुसार अब तक किसानों को पांच हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है. मौजूदा स्थिति को देख लग रहा है […]

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पटना : पूरा राज्य सूखे के चपेट में है. जुलाई में औसत से 54% कम बारिश हुई है. बारिश न होने से सबसे अधिक प्रभाव धान की रोपनी पर पड़ा है. एक मोटे अनुमान के अनुसार अब तक किसानों को पांच हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है. मौजूदा स्थिति को देख लग रहा है कि केंद्र बिहार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर सकता है.
31 जुलाई तक की बारिश को आधार मानकर ही केंद्र कोई फैसला लेगा. 31 जुलाई तक बारिश की यही स्थिति रही तो केंद्र अगस्त के पहलेया दूसरे सप्ताह में सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर सकता है. कृषि विभाग के उच्चस्तरीय सूत्रों के अनुसार विभाग सारी तैयारी कर रहा है. बताया जा रहा है कि केंद्र पर राजनीतिक दबाव भी शुरू हो गया है.
केंद्रीय कृषि मंत्री भी बिहार के ही हैं.धान की सीधी बुआई से कम लागत पर अधिक लाभ : राज्य में कम बारिश होने के कारण धान की रोपनी जबरदस्त तरीके से प्रभावित हुई है. अधिकतर जिलों में औसत से कम वर्षां हुई है. ऐसी परिस्थिति में धान की सीधी बुआई किसानों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होगा. धान उगाने की इस विधि में खेतों में जीरो टिलेज/सीड ड्रील मशीन से धान की सीधी बुआई की जाती है. इस विधि में सीधे धान के बीजों को अच्छी नमी पर बोया जाता है.
कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि रोपनी धान की तुलना में धान की सीधी बुआई में कम जल की आवश्यकता होती है. पानी, मजदूरी एवं ईंधन की बचत के कारण धान की सीधी बुआई करने पर किसानों को लागत कम एवं उपज ज्यादा प्राप्त होती है तथा उनका शुद्ध लाभ भी अधिक होता है. इसमें किसानों 3,280 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाता है.
महज 20% ही हुई रोपनी
चालू खरीफ मौसम में कृषि विभाग ने 34 लाख हेक्टयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा है लेकिन अभी तक महज 20 फीसदी ही रोपनी हो पायी है. पानी के अभाव में धान का बिचड़ा मर गया जिसके चलते अब अगर बारिश होती भी है तो लक्ष्य के अनुरूप रोपनी नहीं हो पायेगी. जानकारों का कहना है कि किसानों का तो नुकसान हो गया. इसकी भरपाई मुश्किल है. एक जून से 20 जुलाई के बीच सामान्य से
कम बारिश हुई है जबकि एक से 20 जुलाई के बीच सामान्य से 54 फीसदी पर कम बारिश हुई है. 20 जुलाई तक 229.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए लेकिन हुई है 104.8 मिलीमीटर.
पिछले साल इस अवधि में 14 लाख हेक्टयर में रोपनी हुई थी जबकि इस साल अबतक 6.50 लाख हेक्टयर में ही रोपनी हुई है. जहां रोपनी हुई भी है वह पानी के अभाव में पीला पड़ रहा है. बारिश का कोई आसार नजर नहीं आ रहा है. जुलाई में तेज धूप में पिछले तीन दशक से अधिक का रिकार्ड तोड़ दिया है. सूखे की संभावित स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. अगर केंद्र बिहार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करता है तो बिहार को कई तरह की सुविधा मिलेगी.
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