''लाल के लाल लहू'' पुस्तक का लोकार्पण सह काव्य गोष्ठी का आयोजन

प्रगतिशील बुद्धिजीवी साहित्य मंच बरियारपुर के तत्वावधान में शुक्रवार को लोकार्पण सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.
मुंगेर. प्रगतिशील बुद्धिजीवी साहित्य मंच बरियारपुर के तत्वावधान में शुक्रवार को लोकार्पण सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद महतो के कविता संग्रह ”लाल के लाल लहू” का लोकार्पण गजलकार अनिरुद्ध सिन्हा, ”पलाश” पत्रिका व ”कथा काव्य धारा” के संपादक व सुप्रतिष्ठित कथाकार उमाकांत भारतीय ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कथाकार संजीव प्रियदर्शी ने की व संचालन शायर डॉ शशि आनंद अलबेला ने किया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित एवं उपस्थित कवियों को पुष्प माला एवं अंग वस्त्र प्रदान कर किया गया. उमाकांत भारतीय ने कहा कि यह काव्य संग्रह मात्र कविता संग्रह ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील जीवन की दीर्घ साधना का साक्ष्य है. भवानंद सिंह प्रशांत ने कहा कि राजेंद्र प्रसाद महतो की काव्य यात्रा राष्ट्र को समर्पित है जो साहित्य की दिशा में सकारात्मक कदम ही नहीं, बल्कि समाज के लिए ऐतिहासिक प्रतिमान को प्रतिबिंबित करता है. मुख्य अतिथि अनिरुद्ध सिन्हा ने कहा कि इनकी सभी कविताएं राष्ट्रीय प्रेम और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत हैं. द्वितीय सत्र में कवि सम्मान और कवि गोष्ठी की शुरूआत कवि राजेन्द्र प्रसाद महतो ने पांव पसारते पाश्चात्यत सभ्यता पर कहा कि पछिया अपनी चादर पंसारी थे पूर्वी पूरे बदन उघाड़ी. शायर अनिरुद्ध सिन्हा ने सुनाया तुझको दिल में बसा लिया मैंने, ये भी खतरा उठा लिया मैंने… वहीं मशहूर शायर एहतेशाम आलम ने अपनी गजल में कहा कि हम खुशी की किताब ले लेंगे, अपने हिस्से का ख्वाब ले लेंगे… कार्यक्रम में अजगैबीनाथ साहित्य मंच के अध्यक्ष भवानंद सिंह प्रशांत, कवि डॉ श्याम सुंदर आर्य, कथाकार संजीव प्रियदर्शी, शशि आनंद अलवेला, कवि सुनील पटेल, रंग कर्मी शत्रु आर्य, कुमार दिनकर, प्रो शिशिर कुमार सिंह, नागेश्वर नागमणि, दिनकर कुमार, मुख्य रूप से उपस्थित थे.
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