सदर अस्पताल : इमरजेंसी वार्ड की हालत जेनरल वार्ड से भी बदतर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Sep 2016 4:56 AM

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मुंगेर : सदर अस्पताल की इमरजेंसी सेवा दिन प्रतिदिन बदहाल होती जा रही है़ यहां पर मरीजों को गंदगी के बीच इलाज कराना मजबूरी बन गयी है. मरीजों को इंजेक्शन लगाने से पहले स्प्रीट तक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. जिससे मरीजों को संक्रमण होने का भय लगा रहता है़ यदि एम्बुलेंस सेवा की […]

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मुंगेर : सदर अस्पताल की इमरजेंसी सेवा दिन प्रतिदिन बदहाल होती जा रही है़ यहां पर मरीजों को गंदगी के बीच इलाज कराना मजबूरी बन गयी है. मरीजों को इंजेक्शन लगाने से पहले स्प्रीट तक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. जिससे मरीजों को संक्रमण होने का भय लगा रहता है़ यदि एम्बुलेंस सेवा की बात की जाय तो अधिकांश मरीजों को निजी एम्बुलेंस का ही सहारा लेना पड़ता है़

बदहाल है इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्था
कहने को तो इसे इमारजेंसी वार्ड कहा जाता है, किंतु यहां पर जेनरल वार्ड में मिलने वाली सुविधाएं तक नदारद है़ जेनरल वार्ड में भी साफ-सफाई के साथ-साथ शौचालय तथा पेयजल की सुविधा उपलब्ध रहती है़ किंतु सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही पेयजल की़ यहां पर साफ-सफाई की बात करनी बेइमानी है़ मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद सिरिंज को फर्श पर ही फेंक दिया जाता है़ जिसके कारण छोटे से इमरजेंसी वार्ड में सफाई के कुछ ही देर बाद गंदगी का अंबार लग जाता है़ इलाज के दौरान यदि मरीज को शौच लग जाय तो मरीज के साथ-साथ उनके परिजनों को भी भारी फजीहतों का सामना करना पड़ता है़ इतना ही नहीं पीने के लिए मरीजों को बाहर से खरीद कर पानी मंगवाना पड़ता है़
निजी एंबुलेंस का लेना पड़ता है सहारा
इलाज के लिए इमरजेंसी वार्ड पहुंचे मरीजों को जब गंभीर अवस्था में बेहतर इलाज के लिए चिकित्सक रेफर कर देते हैं, तब मरीजों को निजी एम्बुलेंस का सहारा लेना पड़ता है़ कहने को तो अस्पताल में दो एम्बुलेंस हैं, किंतु जरूरत के समय अक्सर ये एम्बुलेंस मरीजों को धोखा दे जाते हैं. कभी यह एम्बुलेंस आउट ऑफ स्टेशन रहता है या फिर यह बताया जाता है कि एम्बुलेंस मरम्मति के लिए पटना गया हुआ है़
नतीजतन मरीजों को आनन-फानन में निजी एम्बुलेंस का ही सहारा लेना पड़ता है़ जबकि इमरजेंसी वार्ड के समीप हमेशा एक एम्बुलेंस उपलब्ध होना चाहिए, ताकि गंभीर मरीजों को तत्क्षण बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में ले जाया जा सके़ एम्बुलेंस के अभाव में कई बार तो यहां मरीजों की जानें तक चली गयी है़ तभी अस्पताल प्रबंधन एम्बुलेंस की समस्या को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही़
इंजेक्शन देने से पूर्व नहीं लगाया जाता स्प्रीट
जब भी मरीज को इंजेक्शन लगाया जाता है, उसके पूर्व इंजेक्शन लगाये जाने वाले स्थान को स्प्रीट से साफ किया जाता है़ ताकि मरीजों को संक्रमण से बचाया जा सके़ किंतु सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रबंधन द्वारा बूंद भर भी स्प्रीट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिसके कारण मरीजों को बिना स्प्रीट लगाये ही इंजेक्शन लगा दिया जाता है़ ऐसे में मरीजों को संक्रामक बीमारी होने का खतरा हमेशा बना रहता है़ किंतु अस्पताल प्रबंधन इस बात से शायद बेखबर है़
शराबबंदी के बाद से अस्पताल में स्प्रीट आना बंद हो गया है़ शौचालय के लिए अभी कोई फंड नहीं है़ पेयजल की व्यवस्था जल्द ही की जायेगी़ जो भी एम्बुलेंस अस्पताल में उपलब्ध हैं, उन्हीं से मरीजों को सेवा उपलब्ध कराया जा रहा है़
डॉ राकेश कुमार सिन्हा, अस्पताल उपाधीक्षक
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