एमयू में संस्कृत जैसी पौराणिक भाषा में शोध से ही वंचित हो रहे विद्यार्थी
Published by : RANA GAURI SHAN Updated At : 14 May 2026 6:03 PM
पीजी में संस्कृत व बांग्ला के पद की स्वीकृति नहीं होने से बढ़ी मुसीबत
– पीजी में संस्कृत व बांग्ला के पद की स्वीकृति नहीं होने से बढ़ी मुसीबत
मुंगेरएक ओर जहां सरकार अपने पौराणिक भाषाओं के प्रति विद्यार्थियों व आमजनों से रूची बढ़ाने के लिये अपील कर रही है. वही मुंगेर विश्वविद्यालय में विद्यार्थी संस्कृत जैसी पौराणिक भाषा में शोध से ही वंचित हो गये हैं. जबकि पीजी में सरकार से एमयू को संस्कृत एवं बांग्ला में पदों की स्वीकृति नहीं मिलने से अबतक एमयू के दोनों विषयों के पीजी विभागों के लिये भी मुसीबत बढ़ गयी है. ऐसे में अब एमयू से संस्कृत एवं बांग्ला में शोध करने को इच्छुक शोधार्थी सरकार और शिक्षा विभाग की ओर देख रहे हैं. हलांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब साल 2023 में पैट परीक्षा के दौरान भी पीजी विभागों के लिये पदों की स्वीकृति नहीं होने के बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा संस्कृत व बांग्ला विषय के आठ सीटों पर नामांकन लिया गया था तो दोबारा इन दोनों विषयों को पैट के लिये क्यों छोड़ दिया गया.
बता दें कि एमयू के संस्कृत पीजी विभाग के लिये सरकार से अबतक पदों की स्वीकृति नहीं मिल पायी है. जिसके कारण वर्तमान में विश्वविद्यालय द्वारा पैट-2024-25 के लिये मांगे जा रहे आवेदन प्रक्रिया में संस्कृत विषय को हटा दिया गया है. जिससे इन संस्कृत में शोध करने को इच्छुक विद्यार्थी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. विदित हो कि एमयू में वर्तमान में संस्कृत विषय में कुल 10 सीटें हैं. जबकि साल 2023 में विश्वविद्यालय द्वारा पहले पैट परीक्षा के दौरान संस्कृत के आठ सीटों पर आवेदन लिया गया था. जिसमें चार विद्यार्थियों ने आवेदन किया. जिनका चयन भी शोध के लिये हुआ. हलांकि इसमें दो शोधार्थी बीच में ही शोध छोड़कर चले गये, लेकिन वर्तमान में एमयू के संस्कृत पीएचडी में दो शोधार्थी शोध कर रहे हैं.संस्कृत पीजी विभाग पर भी अब संकट
एमयू के संस्कृत और बांग्ला विषय में पदों की स्वीकृति नहीं मिलने से अब इन दोनों पीजी विभागों पर भी संकट आ गया है. हलांकि पैट 2023 के दौरान भी विश्वविद्यालय के पास पदों की स्वीकृति नहीं थी, लेकिन पीजी व पीएचडी के लिये अन्य विषयों की तरह संस्कृत और बांग्ला में भी एमयू को राजभवन, सीनेट और सिंडिकेट से अनुमोदन प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद वर्तमान में संस्कृत में सीट खाली होने के बाद भी विश्वविद्यालय द्वारा पैट-2024-25 के लिये संस्कृत विषय में आवेदन नहीं लिया जा रहा है. जबकि अब दोनों पीजी विभागों के लिये पदों की स्वीकृति नहीं होने से इन दोनों पीजी विभागों के अस्तित्व पर भी संकट मंडराने लगा है.कहते हैं अधिकारी
पीआरओ डॉ सूरज कोनार ने बताया कि संस्कृत और बांग्ला विषय के पीजी विभागों को अबतक शिक्षा विभाग से पदों की स्वीकृति नहीं मिल पायी है. जिसके कारण पैट-2024-25 के लिये इन दोनों विषयों में आवेदन नहीं लिया जा रहा है. हलांकि विश्वविद्यालय द्वारा दोनों विषयों के पदों की स्वीकृति को लेकर शिक्षा विभाग को सितंबर 2025 में ही पत्र भेज दिया गया है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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