पानी घटला से की होयतै, नाय चूल्हा बचलै न अनाज...
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Sep 2016 12:00 AM
मुंगेर : बाढ़ का पानी अब लगभग सभी गांवों से निकल चुका है़ किंतु प्रभावित इलाकों के हालात अभी जन-जीवन को बहाल करने की स्थिति में नहीं हैं. गांवों में जहां दलदली की स्थिति बनी हुई है, वहीं पीड़ित परिवारों के घरों में गाद जमा है. इतना ही नहीं सैकड़ों परिवार के आशियानों का कहीं […]
मुंगेर : बाढ़ का पानी अब लगभग सभी गांवों से निकल चुका है़ किंतु प्रभावित इलाकों के हालात अभी जन-जीवन को बहाल करने की स्थिति में नहीं हैं. गांवों में जहां दलदली की स्थिति बनी हुई है, वहीं पीड़ित परिवारों के घरों में गाद जमा है. इतना ही नहीं सैकड़ों परिवार के आशियानों का कहीं अता-पता नहीं है जो गंगा के तेज बहाव में बह कर विलीन हो चुका है़
पीड़ित परिवारों के समक्ष अब न सिर्फ भोजन की समस्या है बल्कि चूल्हे तक का भी फिर से इंतजाम करना होगा़ प्रकृति की विनाशकारी लीला के बाद अब इन पीड़ित परिवारों को प्रशासनिक स्तर पर मिलने वाले राहत की ही आस रह गयी है़ जिससे कि ये फिर से अपने जीवन की नैया को आगे बढ़ा सके़ पानी तो घटा लेकिन बढ़ी समस्या बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी निकल चुका है़ अब वैसे ही स्थान पर बाढ़ का पानी बना है, जहां की भूमि गहरी व छिछली है़ वैसे तो घरों से बाढ़ का पानी निकलते ही लोग अपने घरों की ओर निकलने लगे हैं.
किंतु दियारा क्षेत्रों के पीड़ित परिवार अभी कुछ और दिन शिविरों में ही रहना चाहते हैं. जिससे उन्हें अपने घरों को व्यवस्थित करने का मौका मिल सके़ घरों के राशन को लेकर पीड़ित परिवार खासे चिंतित हैं. उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा है कि अपनी जिंदगी को कहां से आरंभ किया जाये़ उनके पास न तो खाद्यान्न है और न ही खाना पकाने के लिए चूल्हे़ कइयों को रहने का ठिकाना भी अब नहीं रहा़ बिना व्यवस्था का जाये कहांसीताचरण गांव निवासी बाढ़ पीड़ित क्षत्री सिंह, इंद्र देव सिंह, शत्रुघ्न सिंह, अच्छे लाल सिंह, पवन सिंह, फूलेन सिंह ने करुण स्वर में बताया कि ‘ पानी घटला से की होयतै, नाय चूल्हा छै आरू नाय खाय लेलि कुछ अनाज, जे झोपड़ी में रहै रहियै उहो भांसी गेलै, बिना व्यवस्था के अभी कहां जैबै ‘ पीड़ितों ने बताया कि जब तक रहने तथा खाने की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक वे अपने गांव नहीं लौट सकते़ अभी गांव में हर जगह कीचड़ व गाद के कारण दलदली की समस्या बनी हुई है, जिसमें उनके मवेशियों के भी फंसने का डर है़ कार्तिक महीने में आरंभ हो पायेगी खेतीपोलो मैदान के समीप शरण लिए दियारा क्षेत्र के बाढ़ पीड़ित किरपू सिंह, बाल्मीकि सिंह, फकीरा यादव, तनकू यादव, दरोगी साव सहित अन्य ने कहा कि बाढ़ के कारण खेतों में लगाये गये मकई, परबल, चीना, सब्जी व पशुचारा गंगा में डूब कर बर्बाद हो गये.
इस कारण से अब लगभग एक महीने तक तो मवेशियों को पशुचारा की घोर समस्या होगी़ वहीं खेती आरंभ करने में कार्तिक महीने तक समय लग जायेगा़ स्वास्थ्य सेवा को लेकर होगी परेशानीकुतलुपुर, जाफरनगर, टीकारामपुर, झौवाबहियार व हरिणमार पंचायत के बाढ़ पीड़ितों की मानें तो वहां जब तक सड़ांध की स्थिति खत्म नहीं हो जाती, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उन्हें खासे परेशानियों का सामना करना पड़ता है़ उक्त पंचायतों में कोई स्वास्थ्य उपकेंद्र की भी व्यवस्था नहीं है़ बीमार पड़ने पर वहीं के झोलाछाप डॉक्टर का सहारा लेना पड़ता है या फिर मुंगेर सदर अस्पताल आना पड़ता है़ जिसके कारण काफी परेशानी होती है़
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