तीन लाख की आबादी कर रही त्राहिमाम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Aug 2016 7:30 AM

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बाढ़ की त्रासदी झेल रहे पीड़ितों को अभी राहत मिलने वाला नहीं है. एक ओर जहां पिछले 10 दिनों से बाढ़ का कहर झेल रहे पीड़ित उफन रही गंगा के पानी से परेशान हैं. लगभग तीन लाख की आबादी त्राहिमाम कर रही है, वहीं गुरुवार की देर रात आयी तेज आंधी व बारिश ने बाढ़ […]

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बाढ़ की त्रासदी झेल रहे पीड़ितों को अभी राहत मिलने वाला नहीं है. एक ओर जहां पिछले 10 दिनों से बाढ़ का कहर झेल रहे पीड़ित उफन रही गंगा के पानी से परेशान हैं. लगभग तीन लाख की आबादी त्राहिमाम कर रही है, वहीं गुरुवार की देर रात आयी तेज आंधी व बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
मुंगेर : बाढ़ की त्रासदी झेल रहे पीड़ितों को अभी राहत मिलने वाला नहीं है. एक ओर जहां पिछले 10दिनों से बाढ़ का कहर झेल रहे पीड़ित उफन रही गंगा के पानी से परेशान हैं. वहीं अब बारिश की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.
सीधे शब्दों में कहे तो ” नीचे पानी-ऊपर पानी, बीच में झूल रही बाढ़ पीड़ितों की जिंदगानी ” वाली स्थिति है. बाढ़ के बीच जहां लगभग तीन लाख की आबादी त्राहिमाम कर रही है, वहीं गुरुवार की देर रात आयी तेज आंधी व बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. चूंकि यह स्थिति 40 साल बाद आयी है. इसलिए प्रशासन से लेकर आम लोग तक इसकी तबाही का आकलन नहीं किये थे. अब जबकि स्थिति बिगड़ गयी तो चारों ओर हाहाकार मचा है.
दोहरी मार झेलने को विवश बाढ़ पीड़ित
बाढ़ पीड़ित दोहनी मार झेलने को विवश हैं. गुरुवार की रात तेज आंधी के साथ बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा को बढ़ा दी है. हजारों की संख्या में लोग सड़क किनारे, रेलवे लाइन के किनारे तंबू बनाकर रह रहे हैं. जिनके आशियाने तेज हवा की झोकों ने उजाड़ दिये. सदर प्रखंड के रांगा बगीचा, शहर के पोलो मैदान किनारे, राष्ट्रीय उच्च पथ एवं अन्य सड़कों पर बाढ़ पीड़ित पॉलिथीन का तंबू बना किसी तरह बाढ़ की विभिषिका को झेल रहे हैं.
सर छिपाना भी हो रहा मुश्किल
बाढ़ पीड़ितों के लिए जिले में 54 राहत केंद्र बनाये गये है. प्रशासनिक आंकड़ों में इन राहत केंद्रों पर 40 हजार बाढ़ पीड़ित शरण लिये हुए हैं. महिला व बच्चे राहत केंद्र के कमरे व बरामदे पर समय व्यतीत कर रहे. जबकि पुरुष वर्ग सभी खुले आसमान के नीचे रह रहे है.
लेकिन गुरुवार की रात जब आंधी व बारिश होने लगी तो पीड़ितों को सर छुपाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा. लेकिन तब भी सर झुकाने की जगह नहीं मिल पायी. नंदकुमार उच्च विद्यालय वासुदेवपुर केंद्र पर रह रहे बाढ़ पीड़ित मनोहर मंडल, संतोष बिंद, गनौरी बिंद ने कहा कि जब रात में आधी और बारिश होने लगी तो समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें. चूंकि स्कूल के उपर-नीचे सभी जगह लोग भरे हुए हैं. बड़ी मुश्किल से रात गुजारी है. गुरुवार की रात हमलोगों के लिए प्रलय की रात थी.
नाला में भी शौच की उम्मीद खत्म
बाढ़ के कारण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के सामने शौच की समस्या विकराल हो गयी है. सदर प्रखंड के शिवगंज, दरियापुर, मय, तौफिर, जाफरनगर, कुतलुपर, बरियारपुर, कलारामपुर, नीरपुर, फुलकिया, सिंधिया, हेरूदियारा, मोकबीरा चांयटोला सहित बाढ़ प्रभावित सैकड़ों गांवों में बाढ़ के कारण शौचालय की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी है. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश लोग आज भी खुले में शौच करते हैं. जहां पानी ही पानी है.
दूसरी ओर जिन घरों में शौचालय के टंकी बने हुए हैं वह भी पानी से भर चुका है. इस परिस्थिति में लोगों के लिए शौच एक गंभीर समस्या बन गयी है. यहां तक कि राहत केंद्रों पर भी शौचालय की व्यवस्था नहीं है. फलत: केंद्र में रहने वाले लोग इधर-उधर शौच करने को विवश हैं.
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