काग बाबा ने योग साधना से प्राप्त किया सन्यास आश्रम

Published at :31 Dec 2015 6:43 PM (IST)
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काग बाबा ने योग साधना से प्राप्त किया सन्यास आश्रम

काग बाबा ने योग साधना से प्राप्त किया सन्यास आश्रम फोटो – मधेपुरा 04कैप्शन – प्रतिनिधि, मधेपुरासद् गुरुदेव संत सत्यानंद काग बाबा की जयंती समारोह मधेपुरा जिला अंतर्गत साहुगढ़, दुधराम टोला पंचायत नंबर एक में आयोजन की पूर्व संध्या पर शिष्य गुरूवानंद बाबा उनके दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि काग बाबा के अवतरण […]

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काग बाबा ने योग साधना से प्राप्त किया सन्यास आश्रम फोटो – मधेपुरा 04कैप्शन – प्रतिनिधि, मधेपुरासद् गुरुदेव संत सत्यानंद काग बाबा की जयंती समारोह मधेपुरा जिला अंतर्गत साहुगढ़, दुधराम टोला पंचायत नंबर एक में आयोजन की पूर्व संध्या पर शिष्य गुरूवानंद बाबा उनके दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि काग बाबा के अवतरण का दिवस बहुत शुभ है. एक जनवरी 1936 को सदगुरूदेव संत काग बाबा का सहरसा जिला अंतर्गत गोलमा ग्राम में अवतरित हुए. यद्यपि उनका कर्म क्षेत्र ननिहाल मधेपुरा जिला अंतर्गत साहुगढ (जानकी टोला) रहा है. यहां से मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त की. योग्यता प्राप्त किया. उन्होंने मधेपुरा में सहायक निबंधक कार्यालय में लिपिक के पदभार संभालते हुए पारिवारिक जीवन के निर्वाह के अवधि में उसी कार्यालय से प्रधान लिपिक के पद से 1995 में सेवा निवृत हुए. संत काग बाबा ने पारिवारिक आश्रम को सन्यास आश्रम में बदलकर योग साधना से योग की पराकाष्ठा को प्राप्त किया. जिसका प्रत्येक्ष प्रभाव उनके जीवन काल की अनेकों घटनाओं में से एक घटना तीन कौवे वाली है. जो उनकी गोद में बैठ कर साधना तथा उपदेश ग्रहण करने तक साथ रहे. संत काग बाबा ने आत्म से ब्रह्मज्ञान प्राप्त ज्ञान की प्रभा से मानव मात्र के समस्त दुखों का सुगमता तथा सहजता से निवृति के लिए चतुष्पाद साधना आत्मनिरीक्षण, आत्मसंयम, आत्मानुवेषण तथा आत्मदर्शन का अनुवेषण किया. उन्होंने मनुष्य को एक परमात्मा और एक धर्म का संदेश दिया. उन्होंने कहा सृष्टि की उत्पति उसी एक परमात्मा से हुई है. धर्म भी उसी परमात्मा के साथ है. इसलिए मानव मात्र के अंदर एक सगुण धर्म की अभिव्यक्ति सत्य, अहिंसा और प्रेम के रूप में हुई है. यही मानव मात्र का धर्म है, जिसे मानवीय धर्म भी कहते है. जिसके ज्ञान से संप्रदायवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, प्रांतवाद, राष्ट्रवाद, उंच नीच छोटा – बड़ा की दूषित दुर्भावना निर्मूल होकर एक समरस समाज की कल्पना साकार हो सकती है और राम राज्य में बदल सकता है. उन्होंने काग बाबा के दर्शन के आलोक में यह भी कहा कि माता-पिता के बुढ़ापे में समयानुसार भोजन, दवा, वस्त्र शारीरिक हिफाजत तथा अच्छी वचन से सेवा करना सच्ची श्रद्धा है. न कि मृत्योपरांत पिंडदान आदि करना. अपनी मन की शुद्धता ही दुर्गा मां की सच्ची पूजा है. न कि माता के नाम पर किसी जीव की बलि देना. अत: परिवार में रह कर भी किसी सदगुरू से चतुष्पाद साधना का ज्ञान प्राप्त करना परमावश्यक है, तभी आत्म कल्याण तथा जगत का कल्याण संभव है.

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