बेकार पड़े हैं सामान, नहीं होता इस्तेमाल

Published at :26 Apr 2015 8:59 AM (IST)
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बेकार पड़े हैं सामान, नहीं होता इस्तेमाल

खगड़िया: शहर के सभी चापानलों के चालू होने का दावा करनेवाले पीएचइडी को शायद मालूम नहीं कि कार्यालय कैंपस में कितना सामान बिखरा हुआ ह,ै जिससे शहर के लोगों की प्यास बूझ सकती है. हो भी कैसे जब विभाग को यही पता नहीं है कि सप्लाइ द्वारा लोगों को मिल रहा पानी शुद्ध है या […]

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खगड़िया: शहर के सभी चापानलों के चालू होने का दावा करनेवाले पीएचइडी को शायद मालूम नहीं कि कार्यालय कैंपस में कितना सामान बिखरा हुआ ह,ै जिससे शहर के लोगों की प्यास बूझ सकती है. हो भी कैसे जब विभाग को यही पता नहीं है कि सप्लाइ द्वारा लोगों को मिल रहा पानी शुद्ध है या नहीं. विभागीय जानकारी के अनुसार शहर में एक हजार चापानल लगाये गये हैं, जिसके चालू होने का विभाग का दावा करता है. जो अधिकतर खराब हैं. पता नहीं विभाग को यह भी पता है या नहीं कि लाखों रुपये का सामान विभाग के कार्यालय कैंपस में जंग खा रहा है.
इस विभाग का मुख्य काम शहरी क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया करना है, लेकिन विभाग इस काम को भी ठीक से नहीं कर पा रहा है. इस विभाग का दूसरा काम स्वच्छता अभियान है. इसकी तो बात ही छोड़ दीजिए. इसके बाद विधायक कोटे से चापानल, बोरिंग तथा गांव में वाटर सप्लाइ आदि के व्यवस्था करने की जिम्मेदारी भी इसी विभाग के कंधे पर डाली गयी है, लेकिन मजेदार बात यह है कि सरकार की कई महत्वकांक्षी योजना पर कुंडली मार कर बैठने वाले इस विभाग के अधिकारी से कोई काम नहीं हो रहा है. जिस कारण विभाग के अंदर कई योजनाओं को आप अपनी आंख से जंग को खाते हुए देख सकते हैं.
शहर में पेयजल आपूर्ति का हाल
नगर परिषद क्षेत्र में शुद्ध पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था खगड़िया के जिला बनने से पूर्व सन् 1974 में ही की गयी थी. लेकिन पूरे नगर परिषद क्षेत्र में अब तक वाटर सप्लाइ की व्यवस्था नहीं है. उस समय के बाद अब तक इस पाइप लाइन को बदला नहीं गया है. जिससे कि अब सप्लाइ वाटर का पानी स्वच्छ और निर्मल होने के बजाय कीचड़ मय होकर लोगों तक पहुंच रहा है. विभाग के अधिकारी को भी इसके कारणों का पता नहीं है.
कहते हैं ईई
पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता रामाकांत सिंह ने बताया वाटर सप्लाइ की व्यवस्था को बहुत जल्द दुरुस्त किया जायेगा. इसके अलावा जो भी सामान कार्यालय कैंपस में रखे हुए हैं उसका भी उपयोग किया जायेगा.
कहते हैं लोग
नगर परिषद क्षेत्र की रहने वाले प्रेम चंद्र पंडित, चुन्नु कुमार, असगरी खातून, मुमताज बेगम, हसमत अली, नाजमा बेगम, रिजवाना परवीन, समीना खातून ने कहा कि वे लोग तो नगर परिषद को पानी का भी होल्डिंग देते आ रहे हैं, लेकिन पानी कैसा मिल रहा है. सुबह में बदबू दार पानी मन को बेचैन कर देता है. बदबू समाप्त होती है तो कीचड़ युक्त पानी का सप्लाइ चालू हो जाता है. अब इस पानी से क्या किया जाये यह तो विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं. मजबूरन लोग इस पानी से उपयोग पौधे में डालने, घर की सफाई, बरतन की सफाई में करते हैं.
जंग खा रहा है लाखों रुपये का सामान
विभाग के अंदर प्रवेश करते ही विभाग में लापरवाही के आलम का अंदाजा लग गया. विभाग के अंदर लाखों रुपये मूल्य के कीमती पाइप, सैप्टिक टैंक के सीट, कीमती टैंक, फिल्टर जमीन पर रखे हुए थे. जिसे कोई देखनेवाला नहीं था. अगर इन सभी चीजों को जमीन पर उतार दिया जाये तो निश्चित रूप से काम दिखेगा. लेकिन विभाग के अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया. नतीजा रखे गये सामान पर जंगल भी हो गये हैं. अब इस जंगल को ही साफ कराने में पहले पैसे लगेंगे. उसके बाद ही यह योजना लोगों तक पहुंच पायेगी.
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