परिसीमन की पाट में पिस रहे दियारा के लोग

Published at :23 Apr 2015 2:52 AM (IST)
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परिसीमन की पाट में पिस रहे दियारा के लोग

गोगरी : दियारा क्षेत्र के लोगों की व्यथा सुनने वाला कोई नहीं है. गोगरी मुंगेर दियारा परिसीमन व भौगोलिक बनावट के पाट में पिस रहा है. यह क्षेत्र मुंगेर में पड़ता है, लेकिन गंगा नदी के कारण यहां के लोग मुंगेर से मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं. खगड़िया का गोगरी बाजार […]

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गोगरी : दियारा क्षेत्र के लोगों की व्यथा सुनने वाला कोई नहीं है. गोगरी मुंगेर दियारा परिसीमन व भौगोलिक बनावट के पाट में पिस रहा है. यह क्षेत्र मुंगेर में पड़ता है, लेकिन गंगा नदी के कारण यहां के लोग मुंगेर से मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं.
खगड़िया का गोगरी बाजार नजदीक होने से इनका सारा कुछ गोगरी बाजार पर निर्भर है. परिसीमन नहीं होने के कारण खगड़िया में यहां के लोगों को सरकारी लाभ नहीं मिल रहा है. भौगोलिक बनावट के कारण यह क्षेत्र अपराध व नक्सली गतिविधी को लेकर सुर्खियों में रहा है. यहां सुविधाओं का घोर अभाव है. यहां के लोग कई बार खगड़िया जिला से इस क्षेत्र को जोड़े जाने की मांग उठाते रहे हैं.
यहां की भौगोलिक बनावट
यह मूलत: दियरा क्षेत्र जीएन बांध के अंदर का इलाका कहलाता है. इस इलाके में कुछ गांव गोगरी के हैं, तो कई गांव मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड से जुड़े हैं. मुंगेर व इन गांव व पंचायतों के बीच गंगा की मुख्य धारा बहने से यह जिला मुख्यालय से कटा है. जबकि यह गोगरी अनुमंडल मुख्यालय से महज दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर है. इस इलाके में गंगा की उपधारा के साथ गंडक की धारा भी बहती है, जिससे यहां के लोगों को मूलभूत समस्या से जूझते हैं. वहीं भौगोलिक बनावट का फायदा अपराधी व नक्सली उठाते रहे हैं
खगड़िया से जोड़ने की मांग
हरिणमार व झौआबहियार के लोग समस्या व असुविधा को लेकर वर्षों से खगड़िया जिला से जोड़े जाने की मांग करते रहे हैं. लोकसभा चुनाव के समय भी इसी मांग को लेकर वोट बहिष्कार किया. वोट बहिष्कार की घोषणा के बाद नेताओं ने इस ओर पहल का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई.
अपराध का हाल
इस क्षेत्र में वर्षों से अपराध का बोलबाला रहा हैं. यहां नरसंहार की कई घटनाएं घटित हो चुकी है.भौगोलिक बनावट के कारण यहां हथियार तस्कर अपना डेरा जमाये रहते हैं. गत वर्ष लगातार चार मिनी गन फैक्टरी का इस क्षेत्र में उदभेदन हुआ. वर्ष 2012 में नौ मिनी गन फैक्टरी का उदभेदन हुआ था. 2010 में 16 कथित नक्सली की हत्या कर दी गई थी. ऐसे में कई घटनाएं उदाहरण मात्र हैं., जिस पर जिला पुलिस चाह कर भी अंकुश नहीं लगा पा रही है.
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