नेत्र विभाग में एक भी चिकित्सक नहीं

Published at :20 Apr 2015 10:34 AM (IST)
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नेत्र विभाग में एक भी चिकित्सक नहीं

खगड़िया: सौ बेड वाले अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है. मात्र नौ चिकित्सक के सहारे सौ बेड वाले अस्पताल में मरीजों का इलाज किया जा रहा है. यूं माने तो मात्र तीन चिकित्सक ही बाह्य(ओपीडी) कक्ष में मरीजों का इलाज करते हैं. यदि एक चिकित्सक छुट्टी पर चले जाये या अस्वस्थ्य हो जायें, […]

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खगड़िया: सौ बेड वाले अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है. मात्र नौ चिकित्सक के सहारे सौ बेड वाले अस्पताल में मरीजों का इलाज किया जा रहा है. यूं माने तो मात्र तीन चिकित्सक ही बाह्य(ओपीडी) कक्ष में मरीजों का इलाज करते हैं. यदि एक चिकित्सक छुट्टी पर चले जाये या अस्वस्थ्य हो जायें, तो मात्र दो चिकित्सक ही इलाज करते हैं.

आपातकालीन तीन शिफ्ट में चलता है, तो तीन चिकित्सक का ड्यूटी करना अनिवार्य है. जबकि नाइट में ड्यूटी करने वाले चिकित्सक का अगला दिन ऑफ हो जाता है. इस प्रकार आपातकालीन में चार चिकित्सक को लगाना पड़ता है. दो चिकित्सक को इमरजेंसी में ड्यूटी नहीं दिया जाता है, क्योंकि डॉ बीके शर्मा अस्वस्थ्य हैं. एक चिकित्सक सिर्फ रात पोस्टमार्टम का काम देखते हैं. वहीं एक न एक चिकित्सक को प्राय: कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है.

नेत्र मरीज का नहीं किया जाता है इलाज: सौ बेड वाले अस्पताल में एक भी नेत्र चिकित्सक नहीं हैं. इसके कारण मरीजों को भटकना पड़ रहा है. नेत्र चिकित्सक डॉ सतीश प्रसाद द्वारा चार माह पूर्व वीआरएस(स्वैच्छिक सेवानिवृत) ले लिया गया है. इसके कारण अंधापन निवारण से संबंधित सभी काम ठप पड़ा है.
एक भी चिकित्सक नहीं हैं एमडी: सौ बेड अस्पताल में एक भी एमडी चिकित्सक नहीं हैं, लेकिन एमडी चिकित्सक को चौथम पीएचसी का प्रभारी बना कर ड्यूटी लिया जा रहा है. इसके कारण सौ बेड वाले अस्पताल में एमडी चिकित्सक का लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है. हृदय रोग से पीड़ित मरीज को कोई देखने वाला कोई विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं है.
जांच के लिए भेजा जाता है भागलपुर: सौ बेड वाले अस्पताल में एक भी पैथोलॉजीस्ट नहीं रहने के कारण मेडीकोलीगल रेप केस के सीमेन की जांच के लिए भागलपुर भेजा जाता है. यदि पैथोलॉजीस्ट यहां उपलब्ध रहता, तो पीड़िता को 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट मिलता और लोगों को त्वरित न्याय मिलने में सुविधा होती. भागलपुर में जांच के लिए भेजे जाने पर जांच रिपोर्ट आने में कम से कम 15 दिनों का समय लग जाता है. जांच रिपोर्ट के गुणवत्ता पर भी प्रश्न चिह्न् उठने लगता है.
गोगरी रेफरल अस्पताल में है पैथोलॉजीस्ट: सौ बेड वाले अस्पताल में एक भी पैथोलॉजीस्ट नहीं है, लेकिन रेफरल अस्पताल गोगरी में पैथोलॉजीस्ट प्रतिनियुक्त हैं. मेडिकोलीगल जांच के लिए पुलिस द्वारा सौ बेड वाले अस्पताल में पीड़िता को लाया जाता है.
कहते हैं उपाधीक्षक: सौ बेड वाले अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ मीरा सिंह ने बताया कि चिकित्सकों की कमी है. इसके बावजूद मरीजों की सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है. चिकित्सकों की कमी को लेकर कई बार विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है.
डीएम ने दिया आदेश: जिला पदाधिकारी राजीव रोशन ने सिविल सजर्न डॉ विजय कुमार सिन्हा को सदर अस्पताल में एमडी चिकित्सक से ड्यूटी लेने का आदेश दिया है. डीएम ने कहा कि इससे लोगों को काफी सुविधा होगी.
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