जेटली की पोटली से कोई खुश, तो कोई मायूस
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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शहर से गांवों तक आम बजट पर लोगों की टिकी रहीं नजरें, दिनभर होती रहीं चर्चाएं भभुआ सदर : देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को संसद में केंद्रीय आम बजट पेश किया. इसी दौरान शहर और गांवों में रहनेवाले विभिन्न वर्गों की भी नजरें इस बजट पर टिकी हुई थीं. लोगों ने […]
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शहर से गांवों तक आम बजट पर लोगों की टिकी रहीं नजरें, दिनभर होती रहीं चर्चाएं
भभुआ सदर : देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को संसद में केंद्रीय आम बजट पेश किया. इसी दौरान शहर और गांवों में रहनेवाले विभिन्न वर्गों की भी नजरें इस बजट पर टिकी हुई थीं. लोगों ने दुकानों व घरों में बजट भाषण देखते नजर आये. बाजार में होटलों व चाय की दुकानों पर टीवी के आगे लोग चाय की चुश्कियां लेते हुए बजट भाषण देख रहे थे. बजट भाषण के दौरान ही लोग बजट को लेकर आपस में चर्चा भी करते रहे और इस पर लोगों की विभिन्न प्रतिक्रियाएं भी चलती रहीं.
कई लोगों ने इसे मिडिल क्लास फैमिली का बजट बताया, तो किसी ने उम्मीद से कम प्रभावी बजट बताया. एकता चौक पर एक होटल में टीवी पर बजट देख रहे रेलवे कर्मचारी बुलबुल गोंड़ ने बताया कि यात्रियों रक्षा पर दिया गया बजट, ई-टिकट पर सर्विस टैक्स मुक्त करना, बड़े स्टेशनों पर एस्केलटर व लिफ्ट लगाना एक अच्छा कदम है. सातवें वेतन आयोग लगने के बाद कर्मचारियों इनकम टैक्स में अधिक छूट मिलने की उम्मीद थी. लेकिन, जितनी उम्मीद की जा रही थी, उतनी राहत नहीं मिली.
कहा कि इस बार भी रेल बजट व आम बजट एक साथ करना रेलवे के लिए नुकसान का सौदा रहा. विकास कार्य, दोहरीकरण, कर्मचारियों को पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं करवाया गया. पास बैठे और बजट में राहत की उम्मीद किये किराना व्यापारी संजय कुमार ने बताया कि आम आदमी नोटबंदी के बाद बजट में राहत की उम्मीद कर रहा था. लेकिन, ये भी खोखला साबित हो रहा है. नौकरी पेशावालों को इनकम टैक्स में जो राहत मिलनी चाहिए थी, वह भी नहीं मिल सकी.
शहर के एक दुकान पर चाय की चुस्की कम बजट पर नजर गड़ाये भाजपा के कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस बजट में मिडिल क्लास, किसानों व युवाओं को सरकार की ओर से फायदा दिया गया है. छोटी कंपनियों के लिए टैक्स में छूट मिलने से काफी राहत मिलेगी. राजनीतिक पार्टियों, ट्रस्ट्स व गैर सरकारी संगठनों पर भी शिकंजा कसा गया है.
किसानों को लाभ पहुंचाने की जगह वाहवाही लूट रही सरकार
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