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रस्म अदायगी साबित हुआ लछुआड़ महोत्सव

Updated at : 18 Apr 2025 9:22 PM (IST)
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रस्म अदायगी साबित हुआ लछुआड़ महोत्सव

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्मभूमि क्षत्रियकुंड लछुआड़ में आयोजित होने वाला पारंपरिक लछुआड़ महोत्सव इस वर्ष निर्धारित समय पर आयोजित नहीं हो सका, इससे आमजन में व्यापक असंतोष देखा गया.

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प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ गया महोत्सव सिकंदरा. जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्मभूमि क्षत्रियकुंड लछुआड़ में आयोजित होने वाला पारंपरिक लछुआड़ महोत्सव इस वर्ष निर्धारित समय पर आयोजित नहीं हो सका, इससे आमजन में व्यापक असंतोष देखा गया. वर्ष 2015 में क्षत्रियकुण्ड जन्मस्थान से भगवान महावीर की प्रतिमा चोरी होने से सुर्खियों में आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर वर्ष 2016 में शुरू हुए इस महोत्सव की पहचान राज्य स्तरीय सांस्कृतिक आयोजन के रूप में बनी थी. कला संस्कृति विभाग द्वारा महावीर जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह दो दिवसीय महोत्सव शुरूआती वर्षों में अत्यंत भव्यता के साथ मनाया जाता था. एक ओर जहां राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर मंत्रीगण उद्घाटन समारोह में शामिल होते थे और दो दिनों तक ख्यातिप्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियां इस आयोजन को गरिमा प्रदान करती थीं. वहीं स्थानीय कलाकारों को भी मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को पहचान दी जाती थी. वहीं दूसरी ओर महोत्सव के दौरान जिला प्रशासन के द्वारा विकास मेला का आयोजन भी किया गया था. लेकिन हाल के वर्षों में जिला प्रशासन और कला संस्कृति विभाग की निरंतर उदासीनता के चलते इस आयोजन की रौनक फीकी पड़ने लगी है. इसके बावजूद 2023 तक महावीर जयंती के अवसर पर यह महोत्सव पारंपरिक स्वरूप में जारी रहा. वहीं गत वर्ष लोकसभा चुनाव के चलते लागू आदर्श आचार संहिता के कारण इसका आयोजन स्थगित करना पड़ा था. परंतु इस वर्ष प्रशासनिक लापरवाही के कारण महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले लछुआड़ महोत्सव का आयोजन ही नहीं हो पाया. इससे आम नागरिकों में भारी नाराजगी उत्पन्न हुई. आखिरकार जिला प्रशासन ने आनन-फानन में महावीर जयंती के एक सप्ताह बाद बुधवार को लछुआड़ महोत्सव की औपचारिकता पूरी की. कभी दो दिनों तक भव्य रूप से मनाया जाने वाला लछुआड़ महोत्सव कुछ ही घंटे में समाप्त हो गया. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सह अधिवक्ता अनिल राय ने कहा कि लछुआड़ महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भगवान महावीर के आदर्शों को जनमानस तक पहुंचाने का माध्यम है. उन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को फिर से पूर्ववर्ती गरिमा के साथ संपन्न किया जाए, ताकि क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सहेजा जा सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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