कर्मा एकादशी 14 को, बहनें रखेंगी भाइयों के लिए व्रत
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 08 Sep 2024 9:41 PM
भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शंकर, माता पार्वती और गणेश की विशेष अराधना
जमुई. कर्मा एकादशी 14 सितंबर को मनेगी. इस पर्व में श्रद्धालु भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शंकर, माता पार्वती और गणेश की विशेष अराधना करते हैं. क्योंकि यह सिर्फ भगवान विष्णु की भक्ति का ही नहीं, बल्कि त्रिदेवों के साथ मां पार्वती जी की पूजन का भी अवसर होता है. पंडित श्रीदेव पांडेय ने बताया कि कर्मा एकादशी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष के एकादशी को मनाया जाता है. यह पर्व बिहार के साथ झारखंड में भी बड़ी संख्या में लोग मानते हैं. मान्यता है कि इस दिन जो महिलाएं मिट्टी से शंकर-पार्वती के साथ गणेश जी की प्रतिमा का निर्माण कर पूजा करते हैं. उनको दोगुना आशीर्वाद प्राप्त होता है. भगवान विष्णु का आशीर्वाद व्यक्ति को पापों से मुक्त करता है, जबकि शंकर और पार्वती की कृपा से पारिवारिक सुख-शांति और समृद्धि मिलती है. भगवान गणेश बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद देते हैं. इस दिन विशेष रूप से महिलाएं व लड़कियां व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं. पूजा के दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र और धतूरा अर्पित किया जाता है. माता पार्वती को लाल चूड़ियां, सिंदूर और शृंगार की वस्तुएं चढ़ायीजाती हैं. भक्तजन मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं. कर्मा एकादशी पर विष्णु, शंकर और पार्वती के साथ गणेश जी की संयुक्त अराधना करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन का व्रत और पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो अपने परिवार की समृद्धि और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं.
भाई-बहन के रिश्तों में आती है मजबूती
श्रीदेव पांडेय के अनुसार कर्मा एकादशी पर गौरा की पूजा करने से भाई-बहन के रिश्ते में मजबूती आती है और भाई की रक्षा के लिए देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस पर्व के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर और लोक परंपराएं भी जीवंत होती हैं. इस प्रकार कर्मा एकादशी का पर्व पारंपरिक और धार्मिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है इसमें हर उम्र के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भाई-बहन के अटूट रिश्ते को भी मजबूत करता है.
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