आर्मी कैंटोनमेंट में शराब बक्रिी की अनुमति देने का क्या औचत्यि : मोदी

Published at :06 Apr 2016 7:28 PM (IST)
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आर्मी कैंटोनमेंट में शराब बक्रिी की अनुमति देने का क्या औचत्यि : मोदी

आर्मी कैंटोनमेंट में शराब बिक्री की अनुमति देने का क्या औचित्य : मोदी पटना . भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि विपक्ष के दबाव में राज्य सरकार को आंशिक शराबबंदी से पीछे हटते हुए पूर्ण शराबबंदी लागू करना पड़ा है. जब जनहित में पूरे राज्य में किसी […]

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आर्मी कैंटोनमेंट में शराब बिक्री की अनुमति देने का क्या औचित्य : मोदी पटना . भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि विपक्ष के दबाव में राज्य सरकार को आंशिक शराबबंदी से पीछे हटते हुए पूर्ण शराबबंदी लागू करना पड़ा है. जब जनहित में पूरे राज्य में किसी भी तरह की शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है तो फिर आर्मी कैन्टोंमेंट में शराब बिक्री की अनुमति देने का क्या औचित्य है. सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि कैन्टोंमेंट के जरिए बिकने वाली शराब बाहर नहीं आयेगी. क्या पहुंच और रसूख वाले कैन्टोंमेंट से शराब हासिल नहीं कर लेंगे. ऐसे में पूर्ण शराबबंदी के अभियान को सरकार कैसे सफल बनायेगी? श्री मोदी ने कहा कि पहली अप्रैल 2015 से पाउच में देसी शराब की बिक्री पर रोक लगा कर उसकी बोटलिंग के लिए राज्य सरकार ने दर्जनों कम्पनियों को अनुमति दी. कम्पनियों ने बैंकों व अन्य स्रोतों से भारी भरकम कर्ज लेकर 10 से 12 करोड़ की लागत से बोटलिंग प्लांट लगाए. अनुदान देने के साथ ही सरकार ने उन्हें पांच वर्षों के लिए लाइसेंस निर्गत की. पूर्ण शराबबंदी के बाद अब बोटलिंग की जरूरत नहीं रही. ऐसे में सरकार की नीति के तहत प्लांट लगाने वालों को कर्ज चुकाने के लिए सरकार को क्षतिपूर्ति देनी चाहिए. इसके साथ ही हाल ही में बार व रेस्टूरेंट में वर्ष 2016–17 के लिए शराब परोसने का लाइसेंस निर्गत कर सरकार ने शुल्क के तौर पर लाखों रुपये की वसूली की है. जब पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई है तो सरकार को अविलम्ब लाइसेंस शुल्क के तौर पर ली गई राशि को वापस करना चाहिए. बिहार में चावल उद्योग के बाद सबसे ज्यादा निवेश डिस्टिलरी और बीयर निर्माण के क्षेत्र में हुआ. सरकार के प्रोत्साहन और आश्वासन के बाद अनेक लोगों ने मक्का, चावल व अन्य अनाजों से स्प्रीट व बीयर बनाने की फैक्ट्री लगाई. पूर्ण शराबबंदी के बाद स्प्रीट और बीयर की खपत बिहार में नहीं होगी, ऐसे में उन्हें बाहर निर्यात करना होगा. सरकार की अनुमति से ही डिस्टिलरी और बीयर उद्योग लगे थे जिन्हें सरकार सबसिडी भी दे रही थी. इस उद्योग को बचाने के लिए सरकार को स्प्रीट पर लगने वाले निर्यात शुल्क को सुसंगत बनाने पर अविलम्ब विचार करना चाहिए. पूर्ण शराबबंदी के बाद देसी शराब की पेट बोटलिंग प्लांट लगाए दर्जनों कम्पनियों और मक्का, चावल तथा अन्य अनाजों से स्प्रीट और बीयर बनाने वाली फैक्ट्रियों के समक्ष संकट उत्पन्न हो गई है. सरकार को देशी शराब की बोटलिंग करने वाली कम्पनियों को जहां क्षतिपूर्ति वहीं अनाजों से बनी स्प्रीट व बीयर की अन्य राज्यों में बिक्री के लिए निर्यात शुल्क में राहत देनी चाहिए.

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