आजादी के दशकों बाद भी 'खटिया' ही एंबुलेंस: झारखंड के सरायकेला में सड़क के अभाव में बीमार को 2 KM ढोया
Published by : Sameer Oraon Updated At : 11 May 2026 3:20 PM
खटिया से मरीज को अस्पताल ले जाते परिजन
Saraikela Road Issues: सरायकेला-खरसावां के चांडिल प्रखंड अंतर्गत गेंगेरदा गांव में सड़क नहीं होने के कारण एक 55 वर्षीय बीमार महिला, बाजार देवी को ग्रामीणों ने खटिया पर लादकर दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाया. यह घटना राज्य में ग्रामीण सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को दर्शाती है. वर्षों से मांग के बावजूद गांव तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है.
Saraikela Road Issues, सरायकेला (हिमांशु गोप की रिपोर्ट): झारखंड राज्य अपने गठन का रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष) मना रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर आज भी वैसी ही धुंधली है जैसी दशकों पहले थी. ताजा मामला चांडिल प्रखंड की हेसाकोचा पंचायत स्थित टुरु टोला गेंगेरदा गांव से सामने आया है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क के अभाव ने एक परिवार को अपनी बीमार महिला को खटिया पर ढोने के लिए विवश कर दिया.
खटिया बनी एंबुलेंस, 2 किलोमीटर का पैदल सफर
जानकारी के अनुसार, गेंगेरदा निवासी बाजार देवी (55 वर्ष) पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं. रविवार को अचानक उनकी स्थिति गंभीर हो गई. गांव तक कोई पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस या अन्य वाहन का पहुंचना असंभव था. ऐसी स्थिति में परिजनों और ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए खटिया को ही ‘डोली’ बनाया और महिला को उस पर लिटाकर उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए करीब दो किलोमीटर पैदल चले.
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मुख्य सड़क तक पहुंचने की जद्दोजहद
ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद मरीज को मुख्य सड़क मातकोमटोड़ाग तक पहुंचाया. वहां से एक निजी वाहन की व्यवस्था की गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल ले जाया गया. ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पैदल चलना भी दूभर हो जाता है.
नेताओं के आश्वासन और ग्रामीणों का आक्रोश
गेंगेरदा गांव के लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है. ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है. सड़क के अभाव में कई बार गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका है, जिससे कइयों की जान पर बन आती है. यह घटना एक बार फिर राज्य सरकार के ‘गांव-गांव तक सड़क’ के दावों की पोल खोलती है. सवाल यह है कि आखिर कब तक झारखंड के सुदूरवर्ती गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवा पाने के लिए इस तरह के संघर्षों से गुजरना पड़ेगा?
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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