जब प्रदेश स्तर पर खराब हुआ रिजल्ट, तो याद आयी व्यवस्था
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 May 2016 8:03 AM
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गया: कॉमर्स इंटर के रिजल्ट में जिले के एक भी छात्र या छात्रा का स्टेट टॉप-10 में जगह नहीं बनाने का दुख कॉलेज प्रबंधनों व स्टूडेंट्स दोनों को है. कॉमर्स के रिजल्ट पर तरह-तरह की बातें हो रही हैं. कॉलेज प्रबंधन अपने यहां व्यवस्था में सुधार की बातें कर रहे हैं. उन्हें पिछले साल का […]
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गया: कॉमर्स इंटर के रिजल्ट में जिले के एक भी छात्र या छात्रा का स्टेट टॉप-10 में जगह नहीं बनाने का दुख कॉलेज प्रबंधनों व स्टूडेंट्स दोनों को है. कॉमर्स के रिजल्ट पर तरह-तरह की बातें हो रही हैं. कॉलेज प्रबंधन अपने यहां व्यवस्था में सुधार की बातें कर रहे हैं. उन्हें पिछले साल का रिजल्ट याद आ रहा है, जब गया कॉलेज के स्टूडेंट्स स्टेट टॉप-10 में एक से नौ तक कब्जा जमाये हुए थे. इधर, जिले के टॉप-10 लिस्ट में सिर्फ गया कॉलेज के छात्रों ने ही परचम लहराया है. अन्य कॉलेजों का रिजल्ट सामान्य ही रहा़.
कॉलेज की शिक्षा पर दिया जाये ध्यान
कॉलेज में शिक्षकों के मौजूद रहने के बावजूद पढ़ाई-लिखाई रेगुलर नहीं हो पाती. स्टूडेंट्स को प्राइवेट कोचिंग का सहारा लेना ही पड़ता है. कॉलेज में हिंदी में पढ़ाई जाती है, जो कॉलेज के अधिकतर स्टूडेंट्स को समझ नहीं आती.
मधु प्रिया, छात्रा
कॉलेज में हड़ताल, आंदोलन व परीक्षा के कारण कोर्स अधूरा ही रह जाता है. ऐसे में स्टूडेंट्स के सामने प्राइवेट कोचिंग ही एकमात्र विकल्प बच जाता है. कॉमर्स में मैथ्स की पढ़ाई नहीं होने के कारण अन्य प्रदेशों में नामांकन में परेशानी होती है.
विनीता कौशिक, छात्रा
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