कोयले का प्रोडक्शन बढ़ा मगर नहीं बढ़ी खपत, देखें केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे का स्पेशल इंटरव्यू
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 14 May 2026 5:46 PM
केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे से बात करते प्रभात खबर के संवाददाता राकेश वर्मा. फोटो: प्रभात खबर
Special Interview: केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोल इंडिया के पास 115 मिलियन टन से अधिक कोयला स्टॉक है. उन्होंने कोयला निर्यात, कोकिंग कोल आयात कम करने, कोल गैसीफिकेशन, बंद खदानों के फाइनल क्लोजर और झरिया एक्शन प्लान पर सरकार की रणनीति साझा की. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
बेरमो से राकेश वर्मा की रिपोर्ट
Special Interview: कोयला उत्पादन में लगातार वृद्धि के बावजूद खपत में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से कोल इंडिया के पास भारी मात्रा में कोयले का स्टॉक जमा हो गया है. केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि वर्तमान में कोल इंडिया के पास 115 मिलियन टन से अधिक कोयला स्टॉक मौजूद है. गुरुवार को बेरमो दौरे के दौरान सीसीएल के कथारा गेस्ट हाउस में प्रभात खबर से विशेष बातचीत में मंत्री ने कहा कि पहले देश में कोयले की कमी के कारण कई पावर प्लांट बंद होने की स्थिति में पहुंच जाते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पावर प्लांटों के पास भी पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है.
बरसात के दिनों में काम आयेगा कोल स्टॉक
केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि बरसात के मौसम में कोयला उत्पादन प्रभावित होता है. ऐसे समय में मौजूदा स्टॉक बिजली उत्पादन और उद्योगों की जरूरत पूरी करने में अहम भूमिका निभाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है.
विदेशों में भी भारतीय कोयले की मांग बढ़ाने की तैयारी
सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि भारत अब अपने उत्पादित कोयले को विदेशों में निर्यात करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. सरकार इस बात पर फोकस कर रही है कि भारतीय कोयले की खपत अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़े. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. पूरी दुनिया गैस संकट से जूझ रही है और भविष्य में कोयले की मांग बढ़ सकती है. ऐसे में भारत अभी से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाजार तलाशने की रणनीति पर काम कर रहा है.
सौर ऊर्जा के साथ कोयले की भी बनी रहेगी भूमिका
मंत्री ने कहा कि देश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का संतुलन जरूरी होगा और कोयला अभी भी देश की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ बना रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में घरेलू उपयोग में भी कोयले के इस्तेमाल को लेकर नई संभावनाएं तलाश की जा रही हैं.
कोकिंग कोल के आयात को कम करने की तैयारी
एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार कोकिंग कोल के आयात को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है. देश में नई कोल वाशरियां स्थापित की जा रही हैं और बंद पड़ी वाशरियों को फिर से चालू करने की योजना बन रही है. उन्होंने बताया कि कोल इंडिया बंद कोल वाशरियों को 30 वर्षों के लिए निजी स्टील कंपनियों को देने की तैयारी कर रही है. हालांकि इन कंपनियों को वाश्ड कोल केवल अपने प्लांट के उपयोग के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति होगी. खुले बाजार में बेचने का अधिकार नहीं दिया जाएगा.
वाशरियों के चालू होने से देश को होगा फायदा
मंत्री ने कहा कि कोकिंग कोयला इस्पात उत्पादन का महत्वपूर्ण हिस्सा है. कई वाशरियों के फिर से शुरू होने से देश को विदेशों से आयातित वाश्ड कोल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि इससे कोल इंडिया को भी आर्थिक लाभ होगा और देश की विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी.
कोल गैसीफिकेशन पर तेजी से काम
सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि सरकार कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं पर भी तेजी से काम कर रही है. इससे रासायनिक उर्वरक और गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोयले के वैकल्पिक उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
चार लेबर कोड का बचाव
चार लेबर कोड के विरोध पर मंत्री ने कहा कि यह कानून मजदूरों और खदान कर्मचारियों के हित में बनाया गया है. उन्होंने विपक्ष पर गलतफहमी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब जीएसटी लागू हुआ था, तब भी अनावश्यक विरोध किया गया था. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह हर सरकारी निर्णय का विरोध कर रहा है.
कोयला चोरी रोकने पर मंत्रालय स्तर पर मंथन
कोलियरियों से कोयला चोरी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इस समस्या को रोकने के लिए मंत्रालय स्तर पर लगातार मंथन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि हाल ही में इस विषय पर लंबी बैठक हुई और कई ठोस कदमों पर चर्चा की गई. सरकार का प्रयास है कि कोयला चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाकर राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
147 बंद भूमिगत खदानों को किया जायेगा फाइनल क्लोजर
बेरमो दौरे के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि कोल इंडिया की 147 भूमिगत खदानें लंबे समय से बंद पड़ी हैं. इन्हें फाइनल क्लोजर की प्रक्रिया के तहत बंद किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बंद खदानों के कारण भू-स्खलन और दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आती रहती हैं. सरकार इन जोखिमों को समाप्त करना चाहती है ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
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झरिया एक्शन प्लान पर तेजी से काम
झरिया एक्शन प्लान के संबंध में मंत्री ने कहा कि इस परियोजना पर काफी गतिशील तरीके से काम चल रहा है. लगातार इसकी समीक्षा की जा रही है. उन्होंने बताया कि लोगों के लिए आवास, शुद्ध पेयजल, बिजली, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है. साथ ही पशुओं के लिए भी रैन बसेरा तैयार करने की योजना है. कई परियोजनाओं के टेंडर जारी हो चुके हैं और कई योजनाओं का डीपीआर तैयार कर लिया गया है. मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में झरिया क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. मौके पर भाजपा नेता विक्रम पांडेय भी मौजूद थे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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