Bokaro News : कसमार की भव्या देश में अव्वल

Published by : JANAK SINGH CHOUDHARY Updated At : 14 May 2026 1:10 AM

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Bokaro News : कसमार की बेटी भव्या रंजन ने सीबीएसइ 12वीं आर्ट्स की परीक्षा में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है.

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कसमार की बेटी भव्या रंजन ने सीबीएसइ 12वीं आर्ट्स की परीक्षा में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है. उन्होंने 500 में 499 (99.8 प्रतिशत) अंक प्राप्त किया है. इससे परिवार के साथ क्षेत्र में उत्साह, उमंग और गर्व का माहौल है. भव्या रंजन पाड़ी गांव निवासी राजीव रंजन उर्फ लक्ष्मीकांत महतो की पुत्री तथा गोमिया के पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो की भतीजी हैं. वह ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल रांची की छात्रा हैं.

मालूम हो कि कुछ दिन पहले ही जैक इंटर की परीक्षा में कसमार प्रखंड के खैराचातर निवासी छोटी कुमारी स्टेट टॉपर रही थी. अब भव्या की उपलब्धि ने कसमार को गौरवान्वित किया है. लगातार दो बड़ी उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश की बेटियां भी लगन और परिश्रम के बल पर अपनी पहचान बना सकती हैं.

परिजनों के अनुसार भव्या शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और अनुशासित रही हैं. हर रोज नियमित चार से पांच घंटे पढ़ाई करती थी. सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर तो नहीं थी, पर उसका उपयोग एक सीमा तक ही किया. पढ़ाई में मोबाइल का कभी सहारा नहीं लिया. इधर, भव्या की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं. पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो, प्रखंड प्रमुख नियोती कुमारी, पूर्व प्रमुख विजय किशोर गौतम, समाजसेवी सुजीत कुमार, स्थानीय मुखिया सरिता देवी, भव्या के बड़े पापा हरिदेव महतो, गंगाधर महतो, रूपेश महतो, अजीत महतो, खैराचातर के पूर्व मुखिया रामसेवक जायसवाल, लोकेश कुमार दे, पंकज कुमार जायसवाल, किशोर कांत, अशोक कुमार सिंह, राजेश कुमार राय आदि ने कहा कि भव्या की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी.

आइएएस अधिकारी बनना है सपना

भव्या रंजन ने बताया कि उनका सपना

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) में जाने का है. आगे चलकर वह संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी करेंगी और प्रशासनिक अधिकारी बन कर समाज एवं देश की सेवा करना चाहती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में नामांकन लेकर आगे की पढ़ाई करना चाहती हूं. सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों एवं परिवार के सदस्यों के सहयोग और मार्गदर्शन को जाता है. भव्या ने कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाये, तो कोई सपना

असंभव नहीं होता.

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