राजद का राष्ट्रीय सचिव नीट पास कराने के लिए लेता था 30-30 लाख, दिल्ली से किया गया गिरफ्तार

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सोशल मीडिया पर वायरल है ये तस्वीर

NEET Paper Scam: नीट परीक्षा और MBBS एडमिशन के नाम पर छात्रों व उनके परिवारों से लाखों रुपये ठगने वाले बड़े गिरोह का दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है. इस मामले में RJD के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल समेत चार आरोपी गिरफ्तार हुए हैं.

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NEET Paper Scam: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो NEET परीक्षा के क्वेश्चन पेपर और MBBS में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर छात्रों और उनके परिवारों से भारी रकम वसूल रहा था. इस मामले में RJD के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल को कथित मास्टरमाइंड बताया गया है. पुलिस ने उनके साथ तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है.

पुलिस जांच में सामने आया कि तीन मई को हुई NEET UG 2026 परीक्षा से पहले इस गिरोह ने कई छात्रों और उनके परिवारों से संपर्क किया था. मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने और कथित क्वेश्चन पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों को अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 18 छात्रों को इनके चंगुल से बाहर निकाला, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल थे.

20 से 30 लाख रुपये तक की मांग

आरोपियों ने अभिभावकों से 20 से 30 लाख रुपये तक मांगे. कई परिवारों से एडवांस पैसा, 10वीं-12वीं की मार्कशीट और हस्ताक्षर किए गए खाली चेक भी लिए गए. गिरोह दावा करता था कि वह परीक्षा से पहले क्वेश्चन पेपर और बाद में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कर देगा.

ऐसे तैयार किए जाते थे फर्जी प्रश्न पत्र

जांच में पता चला कि कथित प्रश्न पत्र असल में पुराने सालों के पेपर और कोचिंग सामग्री को जोड़कर बनाए गए थे. इन्हें असली बताकर छात्रों और परिवारों को गुमराह किया जाता था. पुलिस ने 149 पन्नों की फर्जी प्रश्न-उत्तर सामग्री बरामद की है.

दिल्ली पुलिस को सूरत पुलिस से इस गिरोह की गतिविधियों की सूचना मिली थी. इसके बाद तकनीकी निगरानी के जरिए महिपालपुर और गाजियाबाद में छापेमारी की गई. होटल और फ्लैट से छात्रों को छुड़ाया गया. पुलिस ने डॉक्टर अखलाक आलम, संत प्रताप सिंह और विनोद पटेल को भी गिरफ्तार किया.

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हर आरोपी की तय थी अलग भूमिका

पुलिस के मुताबिक संतोष जायसवाल पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था. डॉ. आलम फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करता था. संत प्रताप व्यवस्था संभालता था, जबकि विनोद पटेल छात्रों और परिवारों तक पहुंच बनाता था.

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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